कौन होते हैं इष्ट देव? जिनकी पूजा करते ही बदल जाएगी किस्मत, जन्मतिथि से ऐसे करें पहचान
इष्ट देव कौन होते हैं? जानें अपनी जन्म कुंडली और राशि के अनुसार अपने आराध्य देव की पहचान करने की सरल विधि। ...और पढ़ें

भाग्य चमका सकती है इष्ट देव की भक्ति। Ai Generated Image

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इष्ट देव की पूजा का बड़ा महत्व है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड में कई दैवीय शक्तियां हैं, लेकिन हर व्यक्ति का जुड़ाव किसी एक खास शक्ति से गहरा होता है। अगर हम अपने इष्ट देव की पहचान कर उनकी पूजा करें, तो जीवन की कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है। आइए यहां जानते हैं कि इष्ट देव कौन होते हैं?

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कौन होते हैं इष्ट देव?
'इष्ट' शब्द का मतलब है प्रिय या पूजनीय। इष्ट देव वे देवता होते हैं, जिनसे हमारे पूर्व जन्मों के कर्म जुड़े होते हैं और जिनकी पूजा करने से हमें जल्द शुभ फल मिलते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, करोड़ों देवी-देवताओं में से वह एक स्वरूप जो आपके सबसे करीब है और जिसके प्रति आपकी अटूट भक्ति है, वही आपके इष्ट देव हैं।
कैसे करें अपने इष्ट देव की पहचान?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इष्ट देव की पहचान करने के दो तरीके हैं -
जन्म कुंडली के अनुसार
कुंडली में 12 भाव होते हैं, जिनमें से पंचम भाव को इष्ट देव का स्थान माना जाता है। इस भाव में जो राशि होती है और उस राशि के जो स्वामी ग्रह होते हैं, उन्हीं के आधार पर आपके इष्ट देव तय होते हैं।
राशि के अनुसार इष्ट देव
- मेष और वृश्चिक राशि - इन राशियों का स्वामी मंगल है, इनके इष्ट देव हनुमान जी हैं।
- वृषभ और तुला राशि - इनका स्वामी शुक्र है, इनकी इष्ट देवी मां दुर्गा या लक्ष्मी जी हैं।
- मिथुन और कन्या राशि - इनका स्वामी बुध है, इनके इष्ट देव भगवान गणेश हैं।
- कर्क राशि - इसका स्वामी चंद्रमा है, इनके इष्ट देव भगवान शिव हैं।
- सिंह राशि - इसका स्वामी सूर्य है, इनके इष्ट देव हनुमान जी या सूर्य देव हैं।
- धनु और मीन राशि - इनका स्वामी बृहस्पति है, इनके इष्ट देव भगवान विष्णु या उनके स्वरूप हैं।
- मकर और कुंभ राशि - इनका स्वामी शनि है, इनके इष्ट देव शनिदेव या हनुमान जी हैं।
इष्ट देव की पूजा के फायदे
इष्ट देव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर कुंडली में अन्य ग्रह अशुभ फल दे रहे हों, तो भी इष्ट देव की कृपा से उन दोषों का प्रभाव कम हो जाता है। इससे जीवन में अपार सफलता मिलती है। साथ ही कामों में आ रहीं बाधाएं दूर होती हैं।
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