पुत्र न हो तो क्या क्या पुत्री कर सकती है माता-पिता का श्राद्ध? गरुड़ पुराण में छुपा है इसका उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार मृतक का श्राद्ध कर्म अत्यंत जरूरी माना जाता है, लेकिन यह कौन कर सकता है और किसके द्वारा किया गया तर्पण स्वीकार्य माना जाता है? आ ...और पढ़ें

पुत्र न होने पर कौन कर सकता है माता-पिता का श्राद्ध (Picture Credit:AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर देखा जाता हैं कि लोगों के मन में एक सवाल आता है कि मृत पूर्वज के श्राद्ध कर्म का अधिकार किसे प्राप्त होता होता है? क्या यह कर्म केवल बेटा कर सकता है या फिर बेटी भी इसमें हिस्सा ले सकती है? वास्तव में इन सवालों का उत्तर जान लेना जरूरी है।
यदि हम गरुड़ पुराण की मानें तो पिता का श्राद्ध आधिकारिक रूप से उसका बेटा ही कर सकता है। अगर किसी व्यक्ति की संतान में सिर्फ बेटी ही हो तो उसका श्राद्ध कर्म क्या बेटी कर सकती है?
पिंड दान समेत श्राद्ध कर्म करना एक बहुत बड़ा धर्म माना जाता है, जिसका मुख्य मकसद पितृ ऋण चुकाना और मृतक की आत्मा को शांति देना होता है। आइए जानें क्या पुत्र की अनुपस्थिति में पुत्री का श्राद्ध कर्म करना ठीक है?
क्या पुत्री कर सकती है माता-पिता का श्राद्ध?
जब भी बात बेटी के अपने माता-पिता का श्राद्ध करने की आती है तो धर्म शास्त्र और गरुड़ पुराण इस बात की अनुमति नहीं देते हैं।
ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं कहा जाता है कि हम अभी भी पितृ सत्तात्मक समाज का हिस्सा हैं बल्कि गरुड़ पुराण में लिखा है कि पुत्र के माध्यम से ही माता-पिता का श्राद्ध करने से उन्हें मुक्ति और मोक्ष मिलता है। यदि बेटी अपनी संतुष्टि के लिए ऐसा करना भी चाहती है तो यह श्राद्ध कर्म स्वीकार्य नहीं माना जाता है।
पुत्र की अनुपस्थिति में कौन श्राद्ध कर सकता है?
किसी भी व्यक्ति का श्राद्ध कर्म करने के लिए यदि पुत्र मौजूद नहीं है तो उसके स्थान अपर पत्नी उसका श्राद्ध कर सकती हो। पत्नी तब अवश्य श्राद्ध कर्म कर सकती है यदि जब कोई भी बेटा, पोता या कोई अन्य प्रत्यक्ष पुरुष मृतक व्यक्ति का वंशज मौजूद न हो जो यह कार्य कर सके।
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यदि किसी व्यक्ति का पुत्र नहीं है तो उसका श्राद्ध पुत्र वधु या पोता भी कर सकते हैं। यदि इनमें से भी कोई मौजूद नहीं हो तो बेटी का बेटा यानी कि नाती अपने नाना या नानी का श्राद्ध कर सकता है और ये स्वीकार्य भी होगा। इन सभी की अनुपस्थिति में पंडित से भी श्राद्ध कर्म करवाया जा सकता है।
श्राद्ध करना जरूरी क्यों माना जाता है?
ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध कर्म किसी भी मृतक के लिए अनिवार्य होता है। पितृ पक्ष की अवधि के दौरान पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को मोक्ष मिल सकता है।
यदि श्राद्ध नहीं किया जाता है तो मृतक की आत्मा तृप्त नहीं होती है। श्राद्ध या तर्पण न करने से घर में पितृ दोष हो सकता है और बिना वजह की समस्याएं आ सकती हैं। वहीं सही नियमों से श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और घर से किसी भी तरह के दोष दूर हो सकते हैं।
मान्यता है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यपरांत श्राद्ध कर्म जरूरी होता है जिससे वंशजों पर कोई भी दोष न लगे और पूर्वजों को प्रसन्न किया जा सके।
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