महिलाएं रुद्राक्ष पहन सकती हैं या नहीं? दूर करें अपना भ्रम
क्या महिलाओं का रुद्राक्ष पहनना वर्जित है? सदियों से चले आ रहे मिथकों की सच्चाई और रुद्राक्ष पहनने के सही नियम यहां पढ़ें। ...और पढ़ें

क्या रुद्राक्ष पहनना हर किसी के लिए सही नहीं? (AI-Generated Image)
HighLights
शास्त्रों में महिलाओं के लिए रुद्राक्ष पहनने की कोई मनाही नहीं है
रुद्राक्ष भगवान शिव से जुड़ा पवित्र बीज माना जाता है
रुद्राक्ष हमेशा साफ और सम्मानपूर्वक धारण करें
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रुद्राक्ष को भगवान शिव का आशीर्वाद माना जाता है। सदियों से साधु-संत, योगी और आम लोग इसका उपयोग ध्यान, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए करते आए हैं। लेकिन, आज भी बहुत से लोगों के मन में एक सवाल बना रहता है कि क्या महिलाएं रुद्राक्ष पहन सकती हैं या नहीं?
दरअसल, कई महिलाओं ने बचपन से यह बात सुनी होती है कि रुद्राक्ष केवल पुरुषों या साधुओं के लिए होता है। इसी वजह से वे इसे धारण करने को लेकर असमंजस में रहती हैं। हालांकि, जब हम शास्त्रों और आध्यात्मिक परंपराओं को देखते हैं तो तस्वीर कुछ और ही दिखाई देती है।
पुराने ग्रंथ जैसे शिव पुराण और पद्म पुराण में भी रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया गया है। खासकर, उस रुद्राक्ष का जो एलायोकार्पस गेनिट्रस पेड़ से आता है और जो प्राकृतिक रूप से अरुण घाटी जैसे क्षेत्रों में उगता है। इसे पहनने से अनचाहे प्रभावों से भी सुरक्षा मिलती है।
शिव पुराण में महिलाओं के लिए रुद्राक्ष धारण करने की स्पष्ट अनुमति दी गई है। शिव पुराण के अध्याय 25 में रुद्राक्ष धारण करने के नियमों का वर्णन करते हुए यह श्लोक मिलता है-
सर्वाश्रमाणां वर्णानां स्त्री शूद्राणां शिवाज्ञया।
धार्याः सदैव रुद्राक्षा यतीनां प्रणवेन हि॥ ४७॥
अर्थात- भगवान शिव की आज्ञा से सभी वर्णों, सभी आश्रमों के लोगों, स्त्रियों तथा शूद्रों को सदैव रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। वहीं, संन्यासियों और यतियों को 'ॐ' (प्रणव मंत्र) का जप करते हुए रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
इस श्लोक से स्पष्ट होता है कि रुद्राक्ष धारण करने का अधिकार केवल पुरुषों या साधु-संतों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को भी इसे धारण करने की अनुमति है। शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष भगवान शिव का पवित्र प्रसाद माना गया है, जिसे श्रद्धा और सम्मान के साथ कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है।
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कैसै हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति?
'रुद्राक्ष' शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है कि 'रुद्र' अर्थात भगवान शिव और 'अक्ष' अर्थात आंसू। शिव पुराण के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। यही कारण है कि इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

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खास बात यह है कि किसी भी प्रमुख हिंदू शास्त्र में ऐसा उल्लेख नहीं मिलता कि महिलाओं को रुद्राक्ष धारण करने की अनुमति नहीं है। आध्यात्मिक दृष्टि से रुद्राक्ष एक साधन माना जाता है, जो मन को एकाग्र करने, सकारात्मक सोच विकसित करने और साधना में मदद करने का कार्य करता है। इसलिए, इसे पुरुष और महिला दोनों धारण कर सकते हैं।
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