सावन के अलावा कब की जा सकती है कांवड यात्रा? जानें इसका खास महत्व
कांवड़ यात्रा केवल सावन में नहीं की जाती, बल्कि महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि पर भी की जाती है। यह यात्रा त्याग, समर्पण और आंतरिक शिव को जागृत करने ...और पढ़ें
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कांवड यात्रा कब की जाती है? (Picture Credit- AI)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली| सावन का महीना बेहद खास होता है। इस महीने में भगवान शिव के भक्त जिन्हें भोले कहते हैं, वह कांवड यात्रा पर निकलते हैं। जहां गंगा बहती हैं, वहां से जल कांवड में बांधकर लाया जाता है। इसे भक्त अपने स्थानीय शिवालय मंदिर में जाकर चढ़ाते हैं। अक्सर ऐसा माना जाता है कि कांवड यात्रा सिर्फ सावन के दौरान होती है, लेकिन कुछ और खास दिनों में भी यात्रा की जाती है। आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
सावन के अलावा कब की जाती है कांवड यात्रा?
हम सभी यही जानते हैं कि कांवड यात्रा सिर्फ सावन के महीने में होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, कांवड यात्रा महाशिवरात्रि जो फाल्गुन मास में आती है, उस समय भी की जाती है। इस समय भी लोग कांवड लेकर आते हैं और इसमें भरा गंगाजल भगवान शिव को अर्पित करते हैं, ताकि उनकी भगवान की कृपा बनी रहे। कई सारे लोग प्रत्येक हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि पर भी कांवड के जल से जलाभिषेक करते हैं। इसलिए वो हरिद्वार या अन्य जगहों से जाकर जल लेकर आते हैं।
यात्रा का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व क्या है?
कांवड यात्रा कोई परंपरा नहीं है, बल्कि ये आस्था से जुड़ी है। यह यात्रा बताती है कि त्याग और भगवान के प्रति समर्पण कितना जरूरी होता है? इसलिए लोग इस यात्रा को नंगे पांव करते हैं और रास्ते में आने वाली सेवा को प्राप्त करते हैं। इससे हमें यह पता चलता है कि कैसे सांसारिक सुखों को त्यागकर परमात्मा की शरण ली जाती है।

कांवड यात्रा करते समय किन चीजों को बोला जाता है?
कांवड यात्रा करते समय भक्त हमेशा बम बोले और हर हर महादेव का उद्घोष करते नजर आते हैं। शिव का नाम लेकर इस यात्रा को करते हैं और इसे शांति और शक्ति के साथ पूरा करते हैं, ताकि जीवन में अनुसाशन की जानकारी मिल सके।
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कांवड़ यात्रा का अर्थ केवल जल अर्पित करना नहीं, बल्कि अपने भीतर के शिव को जागृत करना होता है। सावन का समय इसके लिए विशेष माना जाता है। यदि आपके मन में सच्ची श्रद्धा है, तो आप भी भगवान शिव की सेवा में कांवड़ यात्रा का संकल्प ले सकते हैं।
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