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    चैत्र नवरात्र में करें सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ, हर कार्य में मिलेगी सफलता

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Sun, 15 Mar 2026 04:00 PM (IST)

    चैत्र नवरात्र की पावन अवधि 19 मार्च से होने जा रही है। इन 9 दिनों में माता रानी के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। ...और पढ़ें

    Chaitra Navratri 2026 ऐसे पाएं माता रानी की कृपा

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    HighLights

    1. गुरुवार 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं चैत्र नवरात्र

    2. माता रानी के नौ स्वरूपों की होती है पूजा

    3. सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र पाठ से बनते हैं बिगड़े काम

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026)  19 मार्च से शुरू हो रहे हैं, जिसमें भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं। इस अवधि में यदि आप रोजाना सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो इससे आपको मात रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही साधक को शुभ परिणाम भी मिलने लगते हैं।

    सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम् (Saptashloki Durga Stotra)

    ॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥

    शिव उवाच:

    देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी ।
    कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥
    देव्युवाच:
    शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् ।
    मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ॥

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    विनियोग:

    ॐ अस्य श्री दुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः, श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः ।

    ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हिसा ।
    बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥1॥

    दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
    स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
    दारिद्र्‌यदुःखभयहारिणि त्वदन्या
    सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥2॥

    सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ॥3॥

    शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
    सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते ॥4॥

    सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।
    भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते ॥5॥

    रोगानशोषानपहंसि तुष्टा रूष्टा
    तु कामान्‌ सकलानभीष्टान्‌ ।
    त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
    त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥6॥

    सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्र्वरि ।
    एवमेव त्वया कार्यमस्यद्वैरिविनाशनम्‌ ॥7॥

    ॥ इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा संपूर्णम्‌ ॥

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    (AI Generated Image)

    मां दुर्गा के मंत्र

    1. मंत्र: श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:

    2. मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:

    3. सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

    3. मां दुर्गा का ध्यान -

    ॐ जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम|
    लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम॥

    इन बातों का रखें ध्यान

    • पाठ से पहले स्नान करें और दीपक/धूप जलाएं और माता दुर्गा का ध्यान करें।
    • पाठ के दौरान मन को शांत रखें और किसी तरह के नकारात्मक विचार मन में न लाएं।
    • नौ दिनों में प्रतिदिन एक ही समय और एक ही स्थान पर बैठकर पाठ करना उत्तम माना जाता है। 

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