Chaitra Navratri 2026: क्यों अष्टमी के बिना अधूरी है नवरात्र की पूजा? जानें इस तिथि का महत्व और कन्या पूजन विधि
नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) की अष्टमी तिथि के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा का विधान है। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026: अष्टमी तिथि का महत्व। (Ai Generated Image)
HighLights
चैत्र नवरात्र का पर्व बेहद शुभ माना जाता है
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विधान है
इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र शक्ति उपासना के लिए बेहद मंगलकारी मानी जाती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन 'महाअष्टमी' (Maha Ashtami) का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि अगर आपने नौ दिनों तक व्रत रखे हैं, लेकिन अष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा और कन्या पूजन नहीं किया, तो आपकी पूजा अधूरी रह सकती है। आइए जानते हैं क्यों अष्टमी की तिथि इतनी खास है और इस दिन कन्या पूजन करने का सही तरीका क्या है?

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महाअष्टमी कब है? ( Chaitra Navratri 2026 Ashtami Kab Hai?)
चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 दोपहर 01 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी। वहीं, इसका समापन
26 मार्च 2026 सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा। ऐसे में 26 मार्च को महाअष्टमी मनाई जाएगी।
महाअष्टमी का धार्मिक महत्व (Chaitra Navratri 2026 Significance)
नवरात्र की अष्टमी तिथि मां दुर्गा के 'महागौरी' स्वरूप को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मां काली, सरस्वती और लक्ष्मी की शक्तियां एक होकर महिषासुर का वध करने के लिए तैयार हुई थीं। अष्टमी की रात को मां कालरात्रि के साथ-साथ संधि पूजा का भी विधान है, जो अष्टमी और नवमी के मिलन का समय होता है। आध्यात्मिक रूप से यह तिथि भक्तों के सभी पापों के नाश करती है और सुख-शांति प्रदान करती है।
कन्या पूजन की सही विधि (Kanya Pujan Rules)
- कन्याओं को एक दिन पहले ही प्यार और सम्मान से आमंत्रित करें।
- कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए, साथ में एक लंगूर लड़के को भी जरूर हो।
- कन्याओं के घर आने पर सबसे पहले उनके पैरों को साफ पानी या दूध से धोएं और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।
- सभी कन्याओं को साफ आसन पर बिठाएं और उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाकर अक्षत लगाएं।
- उनके हाथों में कलावा बांधें।
- मां दुर्गा को प्रिय हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद कन्याओं को श्रद्धापूर्वक खिलाएं।
- ध्यान रहे कि भोजन सात्विक हो और उसमें लहसुन-प्याज का प्रयोग न हो।
- भोजन के बाद कन्याओं को फल, सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा और उपहार देकर विदा करें।
- अंत में उनके पैर छूना न भूलें।
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