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    Chaitra Navratri 2026: नवरात्र व्रत पारण में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? यहां पढ़ें सही विधि

    Updated: Tue, 24 Mar 2026 12:00 PM (IST)

    नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) के 9 दिनों में का व्रत करने से साधक को माता रानी से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ...और पढ़ें

    चैत्र नवरात्र 2026 (AI Generated Image)

    चैत्र नवरात्र 2026 (AI Generated Image)

    HighLights

    1. अष्टमी और नवमी तिथि पर किया जाता है नवरात्र व्रत पारण

    2. नवरात्र में कन्या पूजन और हवन करना भी है जरूरी

    3. व्रत खोलने समय जरूर ध्यान रखें इन नियमों का ध्यान

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इन तिथियों पर नवरात्र व्रत का पारण किया जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आप किस तरह नवरात्र का व्रत (Navratri Vrat Paran Vidhi) खोल सकते हैं, ताकि आपको व्रत को पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

    जरूर करें ये काम

    नवरात्र व्रत के आखिरी दिन कन्या पूजन जरूर करना चाहिए। सबसे पहले सुबह जल्दी स्नान आदि से निवृत होने के बाद माता दुर्गा की विधि-विधान से परिवार सहित पूजा करें। माता रानी को हलवा-पूरी का भोग लगाएं। साथ ही इन दिन पर हवन भी जरूर करना चाहिए। इस सभी बातों का ध्यान रखने पर ही आपको नवरात्र व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सकता है।

    Chaitra Navratri ai

    (AI Generated Image)

    इस तरह करें कन्या पूजन

    अपनी श्रद्धा के अनुसार, नवरात्र की अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन भी जरूर करना चाहिए। इसके लिए 2 से 10 वर्ष की 7, 9 या फिर 11 कन्याओं को घर बुलाएं। अब उनके पैरों को गंगाजल या साफ जल से धोएं, उन्हें आदरपूर्वक आसन पर बैठाएं।

    सभी कन्याओं के माथे पर रोली/कुमकुम का तिलक लगाकर अक्षत लगाएं। कन्याओं को चुनरी ओढ़ाएं और कलाई में मौली बांधें। अब उन्हें हलवा पूरी खिलाएं। अंत में कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और दान-दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा करें। इसके बाद स्वयं प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत खोलें।

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    Navratri kanya pujan (3)

    (AI Generated Image)

    नवरात्र व्रत खोलने के नियम

    • व्रत खोलने के बाद भी पूरा दिन सात्विक भोजन ही करें।
    • नवरात्र व्रत के पारण के समय भारी या तामसिक भोजन से बचें।
    • व्रती को अपने भोजन में साधारण नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
    • मन पर संयम रखें और माता रानी का ध्यान करना चाहिए।
    • अंत में माता रानी से क्षमा याचना करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।