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    साल में बस 5 घंटे के लिए खुलता है माता का यह अनोखा मंदिर, बिना घी-तेल के खुद जलती है ज्योत

    Updated: Tue, 24 Mar 2026 10:20 AM (IST)

    आज हम आपको छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में स्थित एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी मान्यताएं बहुत ही अद्भुत हैं। ...और पढ़ें

    निरई माता मंदिर से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    निरई माता मंदिर से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    HighLights

    1. छत्तीसगढ़ में स्थित है माता का अनोखा मंदिर

    2. मंंदिर के प्रति भक्तों की है गहरी आस्था

    3. साल में केवल 4-5 घंटों के लिए खुलता है यह मंदिर

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में ऐसे कई मंदिर मौजूद हैं, जिनसे जुड़ी मान्यता हर किसी को हैरान कर देती हैं। आज हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ में स्थित निरई माता मंदिर (Nirai Mata Temple) की। इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। साथ ही इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं भी बहुत ही अनोखी हैं, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

    पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

    छत्तीसगढ़ के धमतरी के मगरलोड क्षेत्र में घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित निरई माता भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। दुर्गम रास्तों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों पर स्थित होने के बाद भी, श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ यहां दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर में श्रद्धालु माता को नींबू, नारियल, और अगरबत्ती भेंट करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे माता प्रसन्न होती है और साधक की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं।

    Nirai Mata mandir AI

    (AI Generated Image)

    क्यों अनोखा है यह मंदिर

    निरई माता मंदिर एक अत्यंत रहस्यमयी और अनोखा सिद्धपीठ है। यह मंदिर साल में केवल एक बार यानी चैत्र नवरात्र के पहले रविवार पर सुबह 4 से 9 बजे यानी मात्र 5 घंटों के लिए खुलता है। इतने सीमित समय के लिए खुलने के कारण भक्तों की भारी भीड़ यहां उमड़ती है।

    इस मंदिर में माता की मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि एक पवित्र गुफा में ज्योत प्रज्वलित होती है। इस ज्योति को लेकर यह मान्यता है कि नवरात्र के पावन अवसर पर यह ज्योत बिना तेल, घी और माचिस के अपने आप प्रज्वलित हो जाती है।

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    क्या हैं मान्यताएं

    अगर मंदिर से जुड़ी मान्यताओं की बात की जाए, तो इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। यहां केवल पुरुष ही पूजा-पाठ कर सकते हैं। इसे पीछे एक पुरानी किंवदंती भी मिलती है। जिसके अनुसार, प्राचीन काल में पहाड़ियों के बीच एक बैगा पुजारी मां निरई की सच्चे मन से सेवा करता था, जिससे देवी अति प्रसन्न थीं।

    मां स्वयं पुजारी को भोजन व स्नान कराती थीं। लेकिन इससे पुजारी की पत्नी के मन में संदेह जागा। इस बात से देवी क्रोधित हो गईं और उन्होंने यह आदेश दिया कि भविष्य में कोई भी स्त्री उनका दर्शन नहीं करेगी। तभी से यह मान्यता चली आ रही है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।