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    Pradosh Vrat 2026: आरती के बिना अधूरा है प्रदोष व्रत, पाठ से मिलेगा पूजा का पूर्ण फल

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 06:20 AM (IST)

    हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सभी कष्ट दूर होते हैं। ...और पढ़ें

    Chaitra Pradosh Vrat 2026: चैत्र प्रदोष व्रत आरती। (Ai Generated Image)

    Chaitra Pradosh Vrat 2026: चैत्र प्रदोष व्रत आरती। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. आज प्रदोष व्रत रखा जा रहा है

    2. यह व्रत शिव-पार्वती को समर्पित है

    3. इस दिन व्रत करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस दिन (Chaitra Pradosh Vrat 2026) भक्ति भाव से प्रदोष व्रत रखते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता, रोग-दोष का नाश होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्रत या पूजा की पूर्णता आरती से ही होती है। ऐसे में सुबह उठें और स्नान करें। फिर शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करें। अंत में आरती करें। ऐसा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

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    ।।भगवान शिव की आरती।।

    ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    एकानन चतुरानन पंचानन राजे।

    हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

    त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।

    त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।

    सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    कर के मध्य कमंडलु, चक्र त्रिशूल धर्ता।

    जगकर्ता जगभर्ता, जग संहारकर्ता॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।

    प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।

    कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

    ॐ जय शिव ओंकारा...

    ।।मां पार्वती की आरती।।

    जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।

    ब्रह्मा शिवजी भी करते, नित्य तुम्हारी माता॥

    जय पार्वती माता...

    अरुंधति, सरस्वती, सावित्री, गौरा मैया,

    ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता॥

    जय पार्वती माता...

    कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री मैया,

    नवदुर्गा रूप तेरे, पूजा करे हम सब मैया॥

    जय पार्वती माता...

    तुम ही अन्नपूर्णा, तुम ही जगजननी मैया,

    तुम ही जगदम्बा, तुम ही जग कल्याणी मैया॥

    जय पार्वती माता...

    तुम ही सर्वेश्वरी, तुम ही वरदानी मैया,

    जो कोई तेरी आरती गावे, सो पावे सुख मैया॥

    जय पार्वती माता...

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