अप्रैल में कब-कब है प्रदोष व्रत? तुरंत नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से सुख-शांति मिलती है और दुख दूर होते हैं। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन, क्रोध से बचाव और ...और पढ़ें
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प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक को सुख-शांति की प्राप्ति होती है और महादेव की कृपा बरसती है। साथ ही जीवन में आ रहे दुख-दर्द दूर होते हैं। इस व्रत को हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। अब कुछ ही दिनों में अप्रैल माह की शुरुआत होने जा रही है। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं अप्रैल में कब-कब किया जाएगा प्रदोष व्रत।

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प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल को रात 12 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन शिव पूजन करने का समय शाम को 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजे तक है।
प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल को शाम को 06 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 29 अप्रैल को रात 07 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन शिव पूजन करने का समय शाम 06 बजकर 54 मिनट से 09 बजकर 04 मिनट तक है।
प्रदोष व्रत के नियम (Pradosh Vrat ke Niyam)
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
- ब्रह्मचर्य के नियम का पालन करें।
- व्रत के दौरान क्रोध और निंदा से बचें।
- किसी से वाद-विवाद न करें।
- अपशब्द न बोलें।
- पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करें।
- मंत्रों का जप करें।
- भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें।
- महादेव को धतूरा, भांग, सफेद पुष्प, चंदन अर्पित करें।
- शिव जी और माता पार्वती की आरती करें।
- मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।
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