कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास? भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उत्तम है यह अवधि
चातुर्मास चार महीने की अवधि है, जो भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए बहुत ही उत्तम मानी जाती है। ...और पढ़ें

जानें कब से शुरू होगा चातुर्मास (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
भगवान विष्णु को समर्पित है चातुर्मास
इस अवधि में शुभ कार्य होते हैं वर्जित
दान, जप, गौ सेवा से मिलता है पुण्य फल
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चातुर्मास वह अवधि है, जब भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में निद्रा अवस्था में चले जाते हैं। इसके बाद कार्तिक माह की एकादशी पर पुनः निद्रा से जागते हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित माना जाता है। माना गया है कि इस अवधि में किए गए किसी भी दान, व्रत, जप और होम से अनगिनत पुण्य प्राप्त होता है।
इस दिन से हो रहा है शुरू
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है और कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी पर इसकी समाप्ति होती है। ऐसे में साल 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 30 सितंबर तक चलने वाला है।

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चातुर्मास का महत्व
चातुर्मास में आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन माह शामिल होते हैं। चातुर्मास का समय केवल आत्म-संयम का नहीं, बल्कि पुण्य संचय का भी होता है। ऐसा माना गया है कि अन्य महीने में किए गए पुण्य कर्मों की तुलना में, चातुर्मास में किए गए शुभ कर्मों का फल कई गुना अधिक मिलता है।
इन कार्यों से मिलता है लाभ
- चातुर्मास में 'नियम' का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है। भले ही आप एक छोटा सा नियम लें जैसे रोज एक दिया जलाना, उसे पूरे 4 महीने तक अटूट श्रद्धा के साथ करें।
- चातुर्मास में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना चाहिए, जिससे मानसिक शांति और क्लेशों से मुक्ति मिलती है।
- चातुर्मास के दौरान रामायण, श्रीमद्भगवद गीता या विष्णु पुराण का नियमित पाठ करने से आत्मिक उन्नति के द्वार खुलते हैं।
- शास्त्रों के अनुसार, गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। ऐसे में चातुर्मास में गौशाला जाकर गायों की सेवा करना, उन्हें हरा चारा या गुड़ खिलाना आपके संचित पापों का नाश करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
- इन चार महीनों में मौन रहने, कम बोलने और पूरी तरह सात्विक भोजन करने का संकल्प लेना चाहिए। इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार होता है।
इस दान से होगा दरिद्रता का नाश
- चातुर्मास में आप गरीबों, ब्राह्मणों और साधु-संतों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराएं और धन का दान करें।
- चूंकि यह समय भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस माह में पीले रंग के वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- आप इस अवधि में गुड़ और चने की दाल का दान कर सकते हैं, जिससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।
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