क्या आपके हाथ में भी महीनों से बंधा है कलावा? पढ़ें इसे बदलने का सही समय और नियम
हिंदू धर्म में कलावे का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे महीनों तक बांधे रखना गलत हो सकता है? आइए यहां इससे जुड़े नियम जानते हैं। ...और पढ़ें

Kalawa Significance: कलावा बदलने की धार्मिक मान्यता और नियम। (Ai Generated Image)
HighLights
कलावा केवल धागा नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है
इसे एक निश्चित समय के बाद बदल देना चाहिए
कलावा उतारने और नया बांधने के लिए नियम बनाए गए हैं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम, पूजा या अनुष्ठान के दौरान हाथ की कलाई पर कलावा यानी मौली बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे रक्षासूत्र भी कहा जाता है, जिसका मतलब है, वह सूत्र जो हमारी रक्षा करे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया था। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि लोग एक बार कलावा बांधने के बाद उसे महीनों तक पहने रहते हैं, जब तक कि वह खुद टूटकर गिर न जाए। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करना न केवल धार्मिक रूप से गलत है, बल्कि यह आपकी ऊर्जा को भी प्रभावित कर सकता है।

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क्यों जरूरी है समय पर कलावा बदलना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब कोई पुजारी मंत्रों के उच्चारण के साथ हमारे हाथ में कलावा बांधता है, तो वह एक संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा से उसे अभिमंत्रित होता है।
- ऊर्जा की अवधि - माना जाता है कि कलावे की आध्यात्मिक शक्ति और संकल्प का प्रभाव लगभग 21 दिनों तक सबसे अधिक सक्रिय रहता है। इसके बाद, धागा पुराना होने के साथ-साथ उसकी ऊर्जा धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।
- अशुद्धता - कलावा सूती धागे से बना होता है। रोजाना के कामों, स्नान आदि के कारण यह अपवित्र हो जाता है। पूजा-पाठ में पवित्रता का बड़ा महत्व है, इसलिए गंदे धागे को कलाई पर बांधे रखना शुभ नहीं माना जाता।
कलावा बदलने का सही समय और दिन
शास्त्रों के अनुसार, कलावा बदलने के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन सबसे सही माने गए हैं। अगर आपने किसी खास व्रत या अनुष्ठान के लिए कलावा बांधा है, तो उस अनुष्ठान की समाप्ति के बाद इसे बदला जा सकता है। सामान्य तौर पर, हर संक्रांति या महीने में एक बार रक्षासूत्र बदल लेना चाहिए।
पुराने कलावे को उतारने के नियम
पुराने कलावे को कभी भी कैंची या किसी धारदार वस्तु से काटकर नहीं निकालना चाहिए, इसे हाथ से खोलकर ही उतारना चाहिए। उतारने के बाद इसे यहां-वहां या कूड़े में फेंकने की गलती कभी न करें, क्योंकि यह एक अभिमंत्रित सूत्र है।
सही तरीका - पुराने कलावे को उतारकर किसी पीपल के पेड़ की जड़ में रख दें या किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें। अगर यह मुश्किल है, तो इसे साफ मिट्टी में दबा दें।
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