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कार्यस्‍थल पर नहीं मिल रही तरक्‍की? नियम से करें गीता के इस अध्याय का पाठ, जल्द मिलेगा रास्‍ता

Updated: Fri, 26 Jun 2026 01:10 PM (IST)

श्रीमद्भगवद्गीता का कर्मयोग अध्याय फल की इच्छा किए बिना कर्तव्य पालन पर जोर देता है। इसका नियमित पाठ कार्यस्थल पर स्पष्टता, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाकर तरक्की का मार्ग प्रशस्त करता है।

गीता के कर्मयोग से पाएं कार्यस्थल पर सफलता और आत्मविश्वास (Picture Credit- AI Generated)

गीता के कर्मयोग से पाएं कार्यस्थल पर सफलता और आत्मविश्वास (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कई बार इस स्थिति से परेशान होकर हम कई बार अपनी किस्‍मत को भी दोष देने लगते हैं, मगर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है 'कर्म कर, फल की चिंता मत कर'। वास्‍तव में यह बात किसी के जीवन को कितना प्रभावित कर सकती है, इसके लिए रोजाना हर किसी को गीता के कर्मयोग का पाठ करना चाहिए।

क्‍या है कर्म योग?

श्रीमद्भगवद्गीता में चार योग बताए गए हैं, जिनमें से कर्मयोग तीसरे अध्याय में वर्णित है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को इस बात को समझा रहे हैं कि हमें फल की इच्छा किए बिना ही अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, क्योंकि यदि कर्म की जगह हमारा ध्यान यदि फल पर होगा, तो हम अपने कर्म को कभी भी ठीक प्रकार से कर ही नहीं पाएंगे।

कर्म योग में श्री कृष्‍ण ने बताया है कि जिस व्‍यक्ति का जैसा स्वभाव होता है, उसके गुण भी वैसे ही होते हैं। गुणों के हिसाब से ही कर्म करता है। कोई भी मनुष्‍य अपने जीवनकाल में किसी भी क्षण बिना कोई कार्य किए नहीं रहता है। श्री कृष्‍ण ने इस अध्‍याय में बताया है कि सोना भी एक क्रिया है। जागते रहते हुए किसी न किसी काम में लगे रहना भी एक क्रीया है। हर वक्‍त हम कर्म कर रहे होते हैं।

फर्क बस इतना है कि हम जो काम कर रहे हैं, उसका उद्देश्‍य क्‍या है? हमारा उद्देश्य सही होगा, हमारा ध्यान अपने उद्देश्य पर होगा, तो हमें विजय जरूर मिल जाएगी। विजय ही हमारे कर्म का फल है।

daily path of geeta karma yog

नियमित कर्म योग का पाठ करने के लाभ

नियमित अगर हम कर्मयोग का पाठ करने लगेंगे तो इससे सबसे ज्यादा असर हमारे विचारों पर पड़ेगा। श्रीकृष्ण ने इस अध्याय में केवल कर्म करने का उपदेश नहीं दिया है। साथ-साथ यह भी बताया है कि किसी भी कर्म को करने का उद्देश्य क्या होना चाहिए। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का उदाहरण देते हुए कहा है, "अगर कोई ब्राह्मण केवल केसरिया रंग का चोला पहन ले, मगर उसके कर्म खराब हों, तो उसे वो फल कैसे प्राप्त हो सकते हैं, जो एक सच्चे ब्राह्मण को प्राप्त होते हैं।" इसलिए अगर आप नियमित कर्म योग का पाठ करते हैं, तो आपको इस प्रकार से लाभ मिलेंगे-

  • नियमित कर्मयोग का पाठ करने से आपको अपने कार्य को करने का सही मार्ग समझ आएगा।
  • इसका पाठ करने से आप अपने काम पर पहले से अधिक फोकस कर पाएंगे।
  • कर्म योग का पाठ करने से आपके अंदर किसी भी काम को करने का आत्‍मविश्‍वास आएगा।
  • इस योग का पाठ करने से आप हमेशा अपना ध्‍यान कर्म करने पर लगाएंगे, न कि समय को व्‍यर्थ करने में।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।