हर बाधा होगी दूर! इस दिन है एकदंत संकष्टी चतुर्थी, नोट करें सही तिथि, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय
एकदंत संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाएगी? आइए यहां सही तिथि और समय जानते हैं।

Ekadanta Sankashti Chaturthi 2026: कब है एकदंत संकष्टी चतुर्थी? (Ai Generated Image)
HighLights
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है
इस दिन गणेश जी की पूजा का विधान है
यह व्रत बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए हुए पूरा नहीं होता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को 'संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है, जिसका मतलब है कि संकटों को हरने वाली चतुर्थी। मई 2026 में पड़ने वाली यह चतुर्थी और भी खास है, क्योंकि यह मंगलवार के दिन आ रही है। ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी को 'अंगारकी संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है, जिसका फल अन्य चतुर्थी से कई गुना अधिक माना गया है। ऐसे में आइए इसकी तिथि से लेकर पूजा विधि तक सभी बातें जानते हैं।
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सही तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 मई 2026 को सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी।
वहीं, चतुर्थी तिथि का समापन 6 मई 2026 को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में पंचांग को देखते हुए ज्येष्ठ महीने की संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 मई को रखा जाएगा।
पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के बाद लाल वस्त्र पहनें।
- गणेश जी के सामने व्रत का संकल्प लें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं।
- उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं, क्योंकि सिंदूर गणेश जी को बहुत प्रिय है।
- गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें।
- भोग के रूप में मोदक या गुड़ से बनी चीजें चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' या 'श्री गणेशाय नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
चंद्रोदय और अर्घ्य का समय
चंद्रोदय रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा।
- अर्घ्य विधि - एक तांबे के पात्र में जल, अक्षत और लाल पुष्प डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।
क्यों खास है यह व्रत?
एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से कर्ज और पारिवारिक कलह का नाश होता है, क्योंकि यह अंगारकी चतुर्थी है, इसलिए इस दिन मंगल देव की भी कृपा प्राप्त होती है, जिससे भूमि और संपत्ति से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होती हैं।
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