Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कब है कालाष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त, काल भैरव मंत्र और व्रत के नियम

    Updated: Sun, 26 Apr 2026 02:59 PM (IST)

    वैशाख माह की कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित एक पावन दिन है। ...और पढ़ें

    Kalashtami April 2026: तिथि, समय और पूजा विधि। Ai Generatesd Image)

    Kalashtami April 2026: तिथि, समय और पूजा विधि। Ai Generatesd Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के काल भैरव स्वरूप को समर्पित है। वैशाख माह में आने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व है, क्योंकि काल भैरव को समय का स्वामी और बाधाओं का नाशक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो साधक इस दिन पूरी भक्ति से व्रत रखता है, उसे अकाल मृत्यु के भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।

    pradosh vrat 3

    वैशाख कालाष्टमी 2026: तिथि

    वैदिक पंचाग के अनुसार, इस बार मासिक कालाष्टमी 9 मई को मनाई जाएगी।

    भगवान काल भैरव पूजा मंत्र

    • ॐ कालभैरवाय नमः।।
    • अतिक्रूर महाकाय कल्पान्तदहनोपम, भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुर्महसि।।
    • ॐ शिवगणाय विद्महे, कालराजाय धीमहि, तन्नो भैरव: प्रचोदयात्।।

    पूजा विधि और व्रत के नियम

    • ब्रह्म मुहूर्त में उठें: दिन की शुरुआत पवित्र नदी में स्नान या पानी में गंगाजल डालकर स्नान से करें।
    • संकल्प: भगवान शिव और काल भैरव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
    • दीप दान: मंदिर में जाकर चौमुखी दीपक जलाएं। भगवान भैरव को सरसों का तेल, काले तिल और उड़द दाल की कचौरी का भोग लगाएं।
    • कुत्ते की सेवा: भगवान काल भैरव का वाहन कुत्ता है, इसलिए इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाने से राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।

    सावधानियां और नियम

    कालाष्टमी का व्रत रखने वालों को इस दिन किसी के साथ अपशब्द नहीं बोलने चाहिए और पूर्ण रूप से सात्विक रहना चाहिए। इस दिन झूठ बोलना या किसी के प्रति ईर्ष्या रखना वर्जित माना गया है।

    यह भी पढ़ें: सुख-समृद्धि के लिए प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं? पढ़ें पूरी लिस्ट

    यह भी पढ़ें: खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के लिए प्रदोष पर ऐसे करें मां गौरी का पूजन, दूर होंगे सभी क्लेश

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।