Falgun Amavasya 2026: पूर्वजों की नाराजगी होगी दूर, फाल्गुन अमावस्या पर इस विधि से करें तर्पण
फाल्गुन अमावस्या पितरों को समर्पित है और हिंदू साल की अंतिम अमावस्या है, जो 17 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन पितरों का तर्पण, दान और स्नान करने से पितृ ...और पढ़ें

Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या के उपाय। (Ai Generated Image)
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अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है
फाल्गुन महीने की अमावस्या का महत्व बहुत ज्यादा होता है
इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 मार्च को मनाई जाएगी
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है। फाल्गुन महीने की अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह हिंदू साल के अंतिम महीने की अमावस्या होती है। इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 मार्च को मनाई जाएगी। अगर आपके कामों में बार-बार बाधा आ रही है या परिवार में अशांति बनी रहती है, तो इस दिन (Falgun Amavasya 2026) अपने पितरों का तर्पण जरूर करें, तो आइए इस आर्टिकल पितृ तर्पण की सरल विधि जानते हैं।

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क्यों खास है फाल्गुन अमावस्या? (Falgun Amavasya 2026 Significance)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि अमावस्या के दिन पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं। फाल्गुन अमावस्या के दिन दान, स्नान और तर्पण करने से न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं। इस दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण पूर्वजों की आत्मा को तृप्त करता है, जिससे वे खुश होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
पितृ तर्पण की सरल विधि (Tarpan Rules)
एक तांबे या पीतल के बर्तन में साफ जल भरें।
इसमें थोड़ा गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल और जौ मिलाएं।
अपने हाथ की अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी पहनें। शास्त्रों में कुशा के बिना तर्पण अधूरा माना जाता है।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
दोनों हथेलियों को जोड़कर जल भरें और अंगूठे की ओर से जल को धीरे-धीरे पात्र में छोड़ें।
जल छोड़ते समय अपने पितरों का ध्यान करें।
तर्पण के बाद पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और सफेद मिठाई का भोग लगाएं, क्योंकि पीपल में देवताओं के साथ पितरों का भी वास माना गया है।
अमावस्या पर दान का महत्व (Falgun Amavasya 2026 Daan Significance)
फाल्गुन अमावस्या पर दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। तर्पण के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को सफेद वस्त्र, चावल, दूध, चांदी या मौसमी फलों का दान जरूर करें। इसके अलावा, इस दिन गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन खिलाना न भूलें। हिंदू धर्म में कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है।
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इन बातों का रखें खास ध्यान
- इस दिन घर में सात्विकता बनाए रखें और मांस-मदिरा का सेवन न करें।
- किसी भी असहाय व्यक्ति या बुजुर्ग का अपमान न करें।
- घर की दक्षिण दिशा में शाम के समय पितरों के नाम का एक दीपक जरूर जलाएं।
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