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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 18, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Falgun Purnima 2024: यहां जानिए फाल्गुन पूर्णिमा व्रत के लाभ और नियम, भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

    Updated: Mon, 18 Mar 2024 10:12 AM (IST)

    फाल्गुन मास की पूर्णिमा बेहद शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन का उपवास रखत ...और पढ़ें

    Falgun Purnima 2024: पूर्णिमा व्रत के लाभ और नियम
    Falgun Purnima 2024: पूर्णिमा व्रत के लाभ और नियम

    HighLights

    1. पूर्णिमा तिथि सबसे शुभ तिथियों में से एक मानी जाती है।
    2. इस माह पूर्णिमा 25 मार्च को पड़ रही है।
    3. यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Falgun Purnima 2024: ज्योतिष शास्त्र में पूर्णिमा तिथि सबसे शुभ तिथियों में से एक मानी जाती है। इस माह पूर्णिमा 25 मार्च, 2024 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक इस दिन का उपवास रखते हैं उन्हें श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है।

    ज्योतिष शास्त्र में इस दिन के व्रत को लेकर कई सारे नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी है। तो आइए जानते हैं -

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    पूर्णिमा व्रत के लाभ

    • हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा हर महीने एक बार आती है।
    • पूर्णिमा परिपूर्णता, प्रचुरता और समृद्धि का प्रतीक है।
    • पूर्णिमा का उपवास रखने से शरीर और मन पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
    • इस उपवास के माध्यम से मन और शरीर को आराम करने का अवसर मिलता है।
    • पूर्णिमा के दिन कई प्रकार की अध्यात्मिक और धार्मिक विधियां की जाती हैं।
    • इस दिन पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-शांति का वास रहता है।

    पूर्णिमा व्रत नियम

    • पूर्णिमा के दिन जातक ब्रह्ममुहूर्त में उठें।
    • इस दिन गंगा या फिर किसी भी पवित्र नदी में डुबकी लगाएं।
    • भगवान विष्णु के लिए सुबह व्रत का संकल्प लें।
    • पूर्णिमा के लिए कोई विशेष पूजा प्रक्रिया नहीं है।
    • इस दिन भगवान सत्यनारायण की भी पूजा अवश्य करें।
    • इस दिन सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
    • इस दिन के व्रत की शुरुआत सूर्योदय के साथ होती है और चंद्रमा के दर्शन के बाद समाप्त होती है।
    • इस शुभ दिन पर पूर्ण चंद्रमा का दर्शन और अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

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    डिसक्लेमर: इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।