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    Sankashti Chaturthi 2026: 5 या 6 फरवरी, कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत? दूर करें तारीख का कंफ्यूजन

    Updated: Tue, 03 Feb 2026 05:04 PM (IST)

    Falgun Sankashti Chaturthi 2026 Date: 5 या 6 फरवरी? अगर आप भी फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी की सही तारीख को लेकर कंफ्यूज हैं, तो यहां जानें पंचांग के अनुसार ...और पढ़ें

    संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब? (Image Source: AI-Generated)

    संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब? (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। फाल्गुन मास (Falgun Maas) की शुरुआत के साथ ही त्योहारों और व्रतों का सिलसिला शुरू हो जाता है। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है, जिसे भगवान गणेश की कृपा पाने का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। इस बार फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी (द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी) बहुत ही शुभ संयोगों में आ रही है।

    फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

    हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। साल 2026 में यह तिथि 5 फरवरी, गुरुवार को पड़ रही है।

    दृक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 5 फरवरी को होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 6 फरवरी को होगा। चूंकि, संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा की पूजा का महत्व है, इसलिए व्रत 5 तारीख को ही रखा जाएगा।

    चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - फरवरी 05, 2026 को 12:09 ए एम
    चतुर्थी तिथि समाप्त - फरवरी 06, 2026 को 12:22 ए एम

    पूजा की विधि और महत्व

    इस दिन भगवान गणेश के 'द्विजप्रिय' स्वरूप की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से उपवास रखता है, उसके जीवन के सभी संकट (विघ्न) दूर हो जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करना अत्यंत फलदायी होता है। पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और कार्य सिद्धि प्राप्त होती है। इस व्रत का समापन रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही होता है।

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    Ganpati Bappa

    (Image Source: AI-Generated)

    चंद्रोदय का समय (Moon Rise Time)

    संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक चंद्र दर्शन न हो जाएं। 5 फरवरी 2026 को चंद्रोदय का समय रात 9 बजकर 35 मिनट (संभावित) रहेगा अलग-अलग शहरों के हिसाब से इस समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

    शास्त्रों में वर्णित कथाओं के मुताबिक, चंद्रमा को अर्घ्य देते समय उसमें रोली, अक्षत और सफेद फूल जरूर डालें। इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।