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गंगा दशहरा पर करें पितृ चालीसा का पाठ, पूर्वजों को मिलेगी तृप्ति

Published: Sat, 25 Apr 2026 05:29 PM (IST)

गंगा दशहरा का दिन केवल पापों की मुक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि पितरों के तर्पण के लिए भी शुभ माना जाता है।

Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा पर करें पितृ चालीसा का पाठ। (Ai Generated Image)

Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा पर करें पितृ चालीसा का पाठ। (Ai Generated Image)

HighLights

  1. गंगा दशहरा के दिन पितरों की पूजा का महत्व है

  2. इस दिन पूर्वजों के नाम से दान-पुण्य करना चाहिए

  3. इस दिन पितृ चालीसा के पाठ से मोक्ष का आशीर्वाद मिलता है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का पर्व बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार और उनकी आत्मा की शांति के लिए ही मां गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए कठिन तपस्या की थी। गंगा जी का आगमन ही पूर्वजों की मुक्ति के लिए हुआ था, इसलिए इस दिन पितृ पूजन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अगर आप किसी वजह से पितृपक्ष में श्राद्ध या तर्पण नहीं कर पाए हैं, तो गंगा दशहरा के दिन पितृ चालीसा का पाठ करना एक बड़ा उपाय है। माना जाता है कि इस दिन किया गया पाठ पितरों को सीधे तृप्ति प्रदान करता है और वे खुश होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

पितृ चालीसा पाठ की विधि

  • सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। अगर हो पाए तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • घर की दक्षिण दिशा में एक चौकी स्थापित करें और उस पर सफेद कपड़ा बिछाएं।
  • अपने पूर्वजों की तस्वीर वहां स्थापित करें और उनके सामने शुद्ध घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
  • हाथ में जल लेकर पितरों का ध्यान करें और पूरी श्रद्धा के साथ 'पितृ चालीसा' का पाठ करें।
  • पाठ के बाद पितरों को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं और बाद में इसे गरीबों में बांट दें।
  • अंत में आरती कर क्षमा प्रार्थना करें।
Ganga Dussehra  (1)

।।श्री पितृ चालीसा।।

॥ दोहा ॥

हे पितरेश्वर आपको,दे दियो आशीर्वाद।

चरणाशीश नवा दियो,रखदो सिर पर हाथ॥

सबसे पहले गणपत,पाछे घर का देव मनावा जी।

हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी॥

॥ चौपाई ॥

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर।चरण रज की मुक्ति सागर॥

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा।मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा॥

मातृ-पितृ देव मनजो भावे।सोई अमित जीवन फल पावे॥

जै-जै-जै पित्तर जी साईं।पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं॥

चारों ओर प्रताप तुम्हारा।संकट में तेरा ही सहारा॥

नारायण आधार सृष्टि का।पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का॥

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते।भाग्य द्वार आप ही खुलवाते॥

झुंझुनू में दरबार है साजे।सब देवों संग आप विराजे॥

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा।कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा॥

पित्तर महिमा सबसे न्यारी।जिसका गुणगावे नर नारी॥

तीन मण्ड में आप बिराजे।बसु रुद्र आदित्य में साजे॥

नाथ सकल संपदा तुम्हारी।मैं सेवक समेत सुत नारी॥

छप्पन भोग नहीं हैं भाते।शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते॥

तुम्हारे भजन परम हितकारी।छोटे बड़े सभी अधिकारी॥

भानु उदय संग आप पुजावै।पांच अँजुलि जल रिझावे॥

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे।अखण्ड ज्योति में आप विराजे॥

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी।धन्य हुई जन्म भूमि हमारी॥

शहीद हमारे यहाँ पुजाते।मातृ भक्ति संदेश सुनाते॥

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा।धर्म जाति का नहीं है नारा॥

हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई।सब पूजे पित्तर भाई॥

हिन्दु वंश वृक्ष है हमारा।जान से ज्यादा हमको प्यारा॥

गंगा ये मरुप्रदेश की।पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की॥

बन्धु छोड़ना इनके चरणां।इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा॥

चौदस को जागरण करवाते।अमावस को हम धोक लगाते॥

जात जडूला सभी मनाते।नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते॥

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है।जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है॥

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी।सुन लीजे प्रभु अरज हमारी॥

निशदिन ध्यान धरे जो कोई।ता सम भक्त और नहीं कोई॥

तुम अनाथ के नाथ सहाई।दीनन के हो तुम सदा सहाई॥

चारिक वेद प्रभु के साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखी॥

नाम तुम्हारो लेत जो कोई।ता सम धन्य और नहीं कोई॥

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत।नवों सिद्धि चरणा में लोटत॥

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी।जो तुम पे जावे बलिहारी॥

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे।ताकी मुक्ति अवसी हो जावे॥

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे।सो निश्चय चारों फल पावे॥

तुमहिं देव कुलदेव हमारे।तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे॥

सत्य आस मन में जो होई।मनवांछित फल पावें सोई॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।शेष सहस्र मुख सके न गाई॥

मैं अतिदीन मलीन दुखारी।करहु कौन विधि विनय तुम्हारी॥

अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै।अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥

॥ दोहा ॥

पित्तरौं को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम।

श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम॥

झुंझुनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान।

दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान॥

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझुनू धाम।

पित्तर चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान॥

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा अंधविश्वास के खिलाफ है।

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