Gangaur 2026: गणगौर पूजा में बस एक बार पढ़ लें यह चमत्कारी कथा, तभी पूर्ण होगी पूजा
गणगौर व्रत (Gangaur 2026) चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। ...और पढ़ें

Gangaur 2026: गणगौर पूजा कथा। (Ai Generated Image)
HighLights
गणगौर व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है
यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है
इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर व्रत (Gangaur 2026) किया जाता है। इस साल यह व्रत आज यानी 21 मार्च 2026 को किया जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं, लेकिन अक्सर अनजाने में महिलाएं एक बड़ी भूल कर बैठती हैं, वे पूजा तो कर लेती हैं लेकिन व्रत कथा सुनना या पढ़ना भूल जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार, गणगौर की पूजा तब तक अधूरी रहती है, जब तक कि इसकी पावन कथा का पाठ न किया जाए, तो आइए पढ़ते हैं -
गणगौर व्रत कथा (Gangaur 2026 Katha)

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एक बार भगवान शंकर माता पार्वती और देवर्षि नारद जी के साथ पृथ्वी पर घूमने निकले। चलते-चलते वे चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन एक गांव में पहुंचे। जैसे ही खबर फैली कि शिव-पार्वती आए हैं, सभी स्वादिष्ट भोजन और छप्पन भोग तैयार करने में लग गईं। वे सज-धजकर आईं, जिसमें उन्हें काफी समय लग गया। दूसरी ओर, साधारण और गरीब परिवार की महिलाएं जैसे ही यह खबर सुनीं, वे जिस हाल में थीं, उसी हाल में दौड़कर आईं। उनके पास चढ़ाने के लिए कीमती पकवान नहीं थे, सिर्फ भक्ति और वन के साधारण फूल थे। उन्होंने अपनी सच्ची श्रद्धा शिव-पार्वती के चरणों में अर्पित कर दी। गरीब महिलाओं की भक्ति देखकर माता पार्वती बहुत खुश हुईं। अमीर महिलाओं के आने से पहले ही, माता गौरी ने उन सभी गरीब महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान दिया और उनके ऊपर सारा सुहाग-रस छिड़क दिया।
जब अमीर महिलाएं कीमती थालियों में भोजन लेकर आईं, तो भगवान शिव ने माता पार्वती से पूछा, 'अब तुम इन्हें क्या वरदान दोगी? तुमने तो सारा सुहाग-रस गरीब महिलाओं को दे दिया।' तब माता गौरी ने मुस्कुराकर कहा, 'स्वामी अमीर महिलाओं को सुहाग-रस का ऊपरी भाग मिलेगा, जो सांसारिक सुख देता है।
लेकिन गरीब महिलाओं को मैंने अपने शरीर के अंश का आशीर्वाद दिया है, जो वास्तविक और अटूट सुहाग है।' इसके बाद माता पार्वती ने नदी तट पर स्नान किया, मिट्टी की गौरी बनाई और भगवान शिव की पूजा की। शिव जी प्रसन्न हुए और उन्हें चिरस्थायी सुहाग का वरदान दिया। तभी से इस दिन गणगौर पूजा का विधान शुरू हुआ।
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