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    अगले जन्म में सुंदर चेहरा मिलेगा या कुरूप? गरुड़ पुराण के अनुसार तय करेंगे आपके ये 5 कर्म

    Updated: Wed, 27 May 2026 07:30 PM (IST)

    गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति के कर्म, स्वभाव और आचरण से उसका अगला जन्म निर्धारित होता है, जिसमें सुंदरता और कुरूपता भी शामिल है। ...और पढ़ें

    कर्म तय करेंगे आपका रूप! ((Picture Credit- AI Generated)

    कर्म तय करेंगे आपका रूप! ((Picture Credit- AI Generated) 

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में से एक जो काफी महत्वपूर्ण ग्रंथों में शामिल है। इस ग्रंथ में भगवान विष्णु और उनके वाहन पक्षीराज गरुड़ के सवांद के जरिए जीवन, मृत्यु, कर्मों के फल और मौत के बाद की स्थिति का उल्लेख देखने को मिलता है।

    गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति का अगला जन्म उसके कर्म, स्वभाव और आचरण से निर्धारित होता है। व्यक्ति की सुंदरता और कुरूपता सिर्फ बाहरी रूप नहीं, बल्कि यह पिछले जन्म के पुण्य और पाप का परिणाम भी बताई गई है।

    महाभारत में वर्णित प्रसिद्ध श्लोक

    यादृशं वपते बीजं क्षेत्रमासाद्य कर्षकः।
    सुकृते दुष्कृते वापि तादृशं लभते फलम्॥

    जिसका मतलब जिस तरह जैसा किसान बीज बोता है, उसे वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार ही फल की प्राप्ति होती है।

    इसके अलावा कर्म और पुनर्जन्म को लेकर श्रीमद्भगवद्गीता में साफ तौर पर कहा गया है कि,

    कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते।

    मतलब- पृथ्वी लोक में जीव अपने कर्मों से ही जन्म लेता है और कर्मों के अनुसार ही उसका भविष्य तय होता है।

    गरुड़ पुराण कर्म और भविष्य

    गरुड़ पुराण में कौन-से कर्म सुंदरता का प्रतीक?

    • दया और सेवा करना
    • सच बोलना
    • माता-पिता और गुरु का सम्मान करना
    • स्त्रियों का सम्मान करना
    • सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण का अनुसरण करना

    गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे कर्मों से व्यक्ति को अगले जन्म में सौंदर्य और प्रभावशाली व्यक्तित्व, अच्छा स्वास्थ्य और सम्मान की प्राप्ति की बात कही गई है।

    जबकि छल, हिंसा, क्रूरता, दूसरों का अपमान करना, लालच और अहंकार की भावना मन में लाना और कमजोर लोगों का शोषण करना ऐसे व्यक्ति को अगले जन्म में कुरूपता और कष्ट का सामना करना पड़ता है।

    गरुड़ पुराण में यह बातें डराने के लिए नहीं, बल्कि नैतिक जीवन की शिक्षा देने के लिए कही गई हैं। भारतीय दर्शन में यह सिद्धांत सदियों से नैतिक व्यवस्था और जीवन के आचरण का आधार माना जाता रहा है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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