विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मृत्यु से पहले गौ दान क्यों किया जाता है ? गरुड़ पुराण में छिपा है कारण

Published: Thu, 08 Jan 2026 08:05 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु से पहले गाय का दान क्यों जरूरी है? जानिए कैसे यह एक दान आत्मा को वैतरणी नदी के कष्टों से बचाकर मोक्ष दिलाता है।

मृत्यु से क्यों करते हैं गाय का दान? (Image Source: AI-Generated)

मृत्यु से क्यों करते हैं गाय का दान? (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. गरुड़ पुराण कहता है कि दान हमेशा जरूरतमंद को ही देना चाहिए

  2. अंतिम समय में किया गया गौ दान आत्मा के लिए सुगम मार्ग का द्वार खोलता है

  3. मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक की कठिन यात्रा करनी पड़ती है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म शास्त्रों, विशेषकर गरुड़ पुराण में मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु और उसके बाद की परलोक यात्रा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण और प्रचलित परंपराओं में से एक है—मृत्यु पूर्व 'गौ दान' (गाय का दान)। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि जीवन के अंतिम समय में किया गया गौ दान व्यक्ति की आत्मा के लिए सुगम मार्ग का द्वार खोलता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक की कठिन यात्रा करनी पड़ती है। इस मार्ग में एक अत्यंत भयानक और कष्टदायक नदी आती है, जिसे 'वैतरणी नदी' कहा गया है। यह नदी रक्त, मवाद और गंदगी से भरी होती है और इसमें भयंकर जीव-जंतु होते हैं। पापी आत्माओं को इस नदी को तैरकर पार करना पड़ता है, जो असहनीय यातना के समान होता है।

ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने जीवनकाल में या मृत्यु से ठीक पहले श्रद्धापूर्वक गाय का दान करता है, वह गाय उस आत्मा की सहायता के लिए वैतरणी नदी के तट पर उपस्थित रहती है। आत्मा उस गाय की पूंछ पकड़कर बड़ी आसानी से उस भयंकर नदी को पार कर लेती है।

पापों से मुक्ति और देवताओं का आशीर्वाद

शास्त्रों में गाय को 'माता' का दर्जा दिया गया है और माना जाता है कि गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। गौ दान करने के पीछे मुख्य उद्देश्य ये होते हैं:

कष्टों का निवारण: यह दान मृत्यु के समय होने वाले प्राणों के कष्ट को कम करता है।

यमलोक में सुगमता: यमलोक का मार्ग बहुत लंबा और दुर्गम है। गौ दान करने वाली आत्मा को इस मार्ग में भूख और प्यास का कष्ट कम होता है।

मोक्ष की प्राप्ति: निस्वार्थ भाव से किया गया गौ दान व्यक्ति के अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित करता है और उसे नर्क की अग्नि से बचाकर सद्गति प्रदान करता है।

दान की सही विधि

गरुड़ पुराण कहता है कि दान हमेशा सुपात्र (जरूरतमंद या विद्वान ब्राह्मण) को ही देना चाहिए। दान में दी जाने वाली गाय स्वस्थ और दूध देने वाली हो तो सर्वोत्तम माना जाता है। यदि साक्षात गाय का दान संभव न हो, तो उसके प्रतीक स्वरूप स्वर्ण या नकद राशि का दान भी फलदायी होता है।

यह भी पढ़ें- दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखना चाहिए? जानें गरुड़ पुराण का रहस्य

यह भी पढ़ें- स्वर्ग की चाबी, इन 7 कामों को करने वाला मनुष्य सीधे जाता है देवलोक

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।