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    दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखना चाहिए? जानें गरुड़ पुराण का रहस्य

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 12:19 PM (IST)

    Garuda Purana: हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखना मना है। जानिए इसके पीछे के धार्मिक, वैज्ञानिक और पौराणिक कारण और गरुड़ पुराण क्या ...और पढ़ें

    दाह संस्कार क्यों नहीं देखते? (Image Source: AI-Generated)

    दाह संस्कार क्यों नहीं देखते? (Image Source: AI-Generated)

    HighLights

    1. पीछे मुड़कर देखने पर नकारात्मक शक्तियां व्यक्ति की कमजोरी को भांप लेती हैं

    2. दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखना भावनाओं को और कमजोर बना सकता है

    3. आत्मा को लगता है परिवार का मोह अभी भी बना हुआ है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद सोलह संस्कारों में से अंतिम, यानी 'अंत्येष्टि संस्कार' को लेकर कई कड़े नियम और परंपराएं बनाई गई हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण परंपरा है- दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर न देखना। अक्सर श्मशान से लौटते समय बड़े-बुजुर्ग हिदायत देते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, पीछे पलटकर मत देखना।

    आइए जानते हैं इसके पीछे के धार्मिक, मनोवैज्ञानिक और पौराणिक कारण:

    धार्मिक और आध्यात्मिक कारण (Garuda Purana)

    गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प के अनुसार, जब शरीर का दाह संस्कार किया जाता है, तो आत्मा को मोह भंग होने में समय लगता है। कहा जाता है कि शरीर जलने के बाद भी आत्मा अपने परिजनों के आसपास मंडराती रहती है और उन्हें पुकारती है।

    मोह का बंधन: अगर परिजन पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आत्मा को लगता है कि परिवार का मोह अभी भी बना हुआ है। इससे आत्मा को परलोक की यात्रा शुरू करने में बाधा आती है। वह वापस मोह के बंधन में बंध सकती है। पीछे न देखना इस बात का प्रतीक है कि अब मृत व्यक्ति का इस संसार से नाता टूट चुका है।

    मनोवैज्ञानिक कारण (Psychological Reason)

    मृत्यु एक गहरा आघात होती है। दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखना व्यक्ति की भावनाओं को और कमजोर बना सकता है।

    भावनात्मक दृढ़ता: पीछे मुड़कर देखने से व्यक्ति के मन में मृतक की स्मृतियां और उसकी जलती हुई चिता का दृश्य फिर से ताजा हो सकता है, जिससे दुख से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। यह नियम व्यक्ति को 'आगे बढ़ने' (Move on) का संदेश देता है।

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    Garuda Purana

    नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव

    शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, श्मशान घाट नकारात्मक ऊर्जाओं और अतृप्त आत्माओं का केंद्र माना जाता है।

    सुरक्षा का भाव: ऐसी मान्यता है कि अगर कोई पीछे मुड़कर देखता है, तो नकारात्मक शक्तियां उस व्यक्ति की कमजोरी को भांप लेती हैं और उसके प्रति आकर्षित हो सकती हैं। सीधा आगे बढ़ना आत्मिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक तरीका माना गया है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।