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    गरुड़ पुराण के ये 10 महादान: मरने के बाद दिलाते हैं नरक की यातनाओं से मुक्ति और मोक्ष

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 02:30 PM (IST)

    गरुड़ पुराण के अनुसार, हिंदू धर्म में दान-दक्षिणा का विशेष महत्व है, जिससे व्यक्ति को इस जन्म में पुण्य और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। ...और पढ़ें

    गरुड़ पुराण के 10 महादान कौन-से हैं? (AI-Generated Image)

    गरुड़ पुराण के 10 महादान कौन-से हैं? (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. गरुड़ पुराण में दान-दक्षिणा का विशेष महत्व बताया गया है।

    2. गौदान, स्वर्ण दान, नमक दान मोक्ष प्राप्ति में सहायक हैं।

    3. ये महादान नरक की यातनाओं से मुक्ति दिलाते हैं।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के साथ अन्य सभी धर्मों में दान-दक्षिणा का विशेष महत्व है। गरुड़ पुराण के अनुसार, दान-दक्षिणा करने का पुण्य न केवल व्यक्ति को इस जन्म में मिलता है, बल्कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    वैष्णव संप्रदाय के अत्यंत खास और पवित्र गरुड़ पुराण में इस बात का उल्लेख देखने को मिलता है कि, कुछ खास चीजों का दान करने से न केवल मरने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है, बल्कि नरक से जुड़ी यातनाओं से भी मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के उन 10 महादान के बारे में।

    गौदान

    गरुड़ पुराण के अनुसार, गौदान (गाय का दान) सभी दानों में सर्वोत्तम माना जाता है। मरने के बाद आत्मा को यमलोक की कठिन यात्रा के दौरान नर्क की वैतरणी नदी पार करनी होती है। गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि, जो भी व्यक्ति गोदान करता है, उसकी आत्मा बड़ी आसानी से नर्क की वैतरणी नदी को पार कर लेती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    भूमि दान

    गरुड़ पुराण के अनुसार, किसी को भूमि का दान करने धार्मिक नजरिए से अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी जरूरतमंद या देवालय (देवताओं का घर) बनाने के लिए जमीन दान की जाती है, तो मृत्यु के बाद उस व्यक्ति को परलोक में आश्रय मिलता है।

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    तिल का दान

    हिंदू धर्म में तिल को पवित्र माना जाता है। तिल का संबंध शनि देव से भी है। माना जाता है कि, तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है। गरुड़ पुराण के अनुसार जो भी व्यक्ति जीते जी तिल का दान करता है, उसे मृत्यु के बाद शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पुराने दोष और पाप भी नष्ट होते हैं।

    सोने का दान

    गरुड़ पुराण के अनुसार, स्वर्ण यानी सोने का दान सबसे उत्तम और पापों का नाश करने वाला महादान माना जाता है। इसे दान करने से यमलोक में दंड और नरक में मिलने वाली कष्टों से मुक्ति मिलती है।

    घी का दान

    गरुड़ पुराण के मुताबिक, घी का दान करने से मरने के बाद आत्मा को ऊर्जा, बल और तृप्त की प्राप्ति होती है। घी को भी महादान की श्रेणी में रखा जाता है। माना जाता है कि घी से भरा पात्र दान करने से भक्ति को नरक नहीं जाना पड़ता है।

    गरुड़ पुराण के 10 महादान

    कपड़े का दान

    गरुड़ के मुताबिक, कपड़ों का दान करना आध्यात्मिक नजरिए से बेहद खास माना जाता है। कपड़ों को दान करने से न सिर्फ इस लोक में सुख-समृद्धि मिलती है, बल्कि मरने के बाद परलोक में भी आत्मा को शांति और

    अनाज का दान

    गरुड़ पुराण के मुताबिक, अन्न का दान भी महादान की श्रेणी में आता है। माना जाता है कि, भूखे को खाना खिलाने या अन्न का दान करने से यमलोक के रास्ते में जीवात्माओं को भूख-प्यास का सामना नहीं करना पड़ता है।

    गुड़ का दान

    हिंदू धर्म में गुड़ का दान काफी खास महत्व रखता है। गुड़ का दान करने से जीवन और रिश्तों में मधुरता रहने के साथ पितृ भी तृप्त भी होते हैं।

    चांदी का दान

    ज्योतिष शास्त्र में चांदी का संबंध चंद्रमा से होता है। ऐसे में चांदी का दान करने से जीवन में मानसिक शांति प्राप्त होने के साथ पितृ दोष की समस्या भी दूर होती है। गरुड़ पुराण के अनुसार चांदी दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    नमक का दान

    गरुड़ पुराण के अनुसार, साधारण सी नजर आने वाला नमक भी महादान की श्रेणी में आता है, जिस वजह से जो व्यक्ति नमक का दान करता है, उसे मरने के बाद यमराज के डर और नर्क की यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है।

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