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    मृत शरीर को अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं इसके कारण

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 10:03 AM (IST)

    गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत शरीर को अकेला छोड़ना उचित नहीं माना जाता। जानिए इस परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यताएं, आध्यात्मिक कारण। ...और पढ़ें

    गरुड़ पुराण के नियम (AI-Generated Image)

    गरुड़ पुराण के नियम (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. मृत्यु के बाद शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता

    2. पंचक में मृत्यु होने पर विशेष नियमों का पालन किया जाता है

    3. आत्मा के शरीर के आसपास रहने की मान्यता प्रचलित है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्म और मृत्यु को जीवन का अटूट सत्य माना गया है। जो इस संसार में जन्म लेता है, उसे एक दिन शरीर त्यागना ही पड़ता है। गरुड़ पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु के बाद होने वाले संस्कारों और नियमों का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन्हीं में एक महत्वपूर्ण परंपरा मृत शरीर को कभी भी अकेला न छोड़ने की है। आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण।

    जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और अंतिम संस्कार में समय होता है, तब परिवार या समाज का कोई न कोई सदस्य शव के पास मौजूद रहता है। इसके पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक दोनों तरह के कारण बताए गए हैं।

    किन परिस्थितियों में अंतिम संस्कार टाल दिया जाता है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका अंतिम संस्कार सामान्यतः अगले दिन किया जाता है। इसी तरह पंचक काल में मृत्यु होने पर भी कई परिवार विशेष विधि-विधान अपनाने के बाद ही दाह संस्कार करते हैं।

    इसके अलावा अगर मृतक का पुत्र, पुत्री या निकट संबंधी दूर स्थान पर हो और अंतिम दर्शन या अंतिम संस्कार के लिए आने वाला हो, तो उसके पहुंचने तक शव को सुरक्षित रखा जाता है।

    मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा को लेकर क्या मान्यता है?

    गरुड़ पुराण में आत्मा की यात्रा का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि जीव अपने कर्मों के अनुसार, अलग-अलग योनियों में जन्म लेता है और पुनर्जन्म का यह चक्र तब तक चलता रहता है, जब तक उसे मोक्ष प्राप्त नहीं हो जाता।

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    शव को अकेला न छोड़ने के धार्मिक कारण

    गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद कुछ समय तक आत्मा अपने शरीर और परिजनों के आसपास रह सकती है। ऐसा माना जाता है कि जब तक अंतिम संस्कार नहीं हो जाता, तब तक आत्मा का शरीर से एक सूक्ष्म संबंध बना रहता है। कई धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि रात के समय नकारात्मक शक्तियां या अशुभ ऊर्जाएं सक्रिय रहती हैं, इसलिए शव के पास किसी का मौजूद रहना शुभ माना जाता है।

    यह भी हैं महत्वपूर्ण कारण

    शव को अकेला न छोड़ने के पीछे केवल धार्मिक कारण ही नहीं हैं। पुराने समय में घरों में शीतगृह (मॉर्चरी) जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। ऐसे में शव की सुरक्षा के लिए किसी का उपस्थित रहना जरूरी माना जाता था।

    इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाता है कि कोई पशु, कीट या अन्य जीव शव के पास न पहुंचे। साथ ही, वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए धूप, अगरबत्ती और दीपक जलाने की परंपरा भी रही है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।