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    गायत्री मंत्र में ऐसा क्या छिपा है जो इसे सबसे खास बनाता है, आखिर क्यों है ये वेदों की आत्मा?

    Updated: Mon, 15 Jun 2026 09:52 AM (IST)

    गायत्री मंत्र को सनातन धर्म का सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है। जानिए इसे वेदों की आत्मा क्यों कहा जाता है, इसका महत्व क्या है और इस दिन पूजा-पाठ का क् ...और पढ़ें

    गायत्री मंत्र का धार्मिक महत्व (AI-Generated Image)

    गायत्री मंत्र का धार्मिक महत्व (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. गायत्री मंत्र को वेदों की आत्मा कहा जाता है

    2. इसके ऋषि महर्षि विश्वामित्र माने जाते हैं।

    3. मंत्र का मुख्य संदेश ज्ञान और सद्बुद्धि की प्राप्ति है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में गायत्री मंत्र को सबसे प्रभावशाली और पवित्र मंत्रों में से एक माना जाता है। यह मंत्र केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और आत्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इसे अक्सर "वेदों की आत्मा" कहा जाता है। हर साल गायत्री जयंती के अवसर पर श्रद्धालु मां गायत्री की पूजा करते हैं और इस मंत्र का विशेष जाप करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गायत्री मंत्र का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तृतीय मंडल (मंडल 3), सूक्त 62, मंत्र 10 में मिलता है। 

    ॐ भूर्भुवः स्वः।
    तत्सवितुर्वरेण्यं
    भर्गो देवस्य धीमहि।
    धियो यो नः प्रचोदयात्॥

    ऋग्वेद के तीसरे मंडल (सूक्त 62, मंत्र 10) में दर्ज है कि इस मंत्र के ऋषि महर्षि विश्वामित्र माने जाते हैं। मंत्र में सूर्य स्वरूप परमात्मा से प्रार्थना की गई है कि वे हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें। यही वजह है कि इसे केवल धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि ज्ञान और विवेक का मंत्र भी कहा जाता है।

    गायत्री मंत्र को वेदों की आत्मा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें वेदों का मूल संदेश समाहित माना गया है। यह मंत्र मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और भ्रम से सत्य की ओर ले जाने की प्रेरणा देता है। मान्यता है कि नियमित रूप से इसका जाप करने से मन शांत होता है और सकारात्मक विचारों का विकास होता है।

    मां गायत्री का प्राकट्य 

    गायत्री जयंती का पर्व मां गायत्री के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां गायत्री को वेदमाता कहा गया है। इस दिन भक्त विशेष पूजा, हवन और मंत्र जाप करते हैं। कई स्थानों पर सामूहिक गायत्री यज्ञ और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

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    मान्यता है कि गायत्री जयंती पर श्रद्धा और नियम के साथ गायत्री मंत्र का जप करने से आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, संयम और सकारात्मक सोच का विकास होता है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था है।

    गायत्री जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और ज्ञान के महत्व को समझने का भी अवसर है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में सही दिशा और विवेक सबसे बड़ी शक्ति है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।