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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Gita Updesh: गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने बताया है सुखी जीवन का राज, आसपास भी नहीं भटकेगा दुख

    Updated: Fri, 03 Jan 2025 04:20 PM (GMT+05:30)

    आज के भागदौड़ भरे समय में खुश रहना एक मुश्किल काम है। ऐसे में आप भगवत गीता में बताए गए उपदेशों को आत्मसात कर जीवन में सुख का अनुभव कर सकते हैं। तो चलि ...और पढ़ें

    Gita Updesh गीता में बताया गया है सुखी जीवन का राज।
    Gita Updesh गीता में बताया गया है सुखी जीवन का राज।

    HighLights

    1. युद्ध भूमि में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था गीता का उपदेश।
    2. रोजाना गीता के पाठ से होता है मानसिक शांति का अनुभव।
    3. गीता में श्रीकृष्ण ने खुद बताए हैं खुश रहने के आसान तरीके।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गीता के उपदेश (Bhagavad Gita Updesh) असल में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को युद्ध की भूमि में दिया गया ज्ञान है। भगवद गीता की मान्यता केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इसे पढ़ा और आत्मसात किया जा रहा है। गीता में वर्णन मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने व्यक्ति को खुश रहने के कुछ तरीके बताते हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    छोड़े दें ये आदतें

    भगवत गीता में श्री कृष्ण, अर्जुन से कहते हैं कि यदि व्यक्ति को प्रसन्न रहना है, तो उसे दूसरों की आलोचना से दूर रहना होगा। इसी के साथ बेवजह दूसरों की शिकायत करना भी छोड़ दें। तभी आप जीवन में खुश रह सकते हैं।

    खुश रहने का मूल मंत्र

    कई बार व्यक्ति हर चीज में दूसरों से अपनी तुलना करता रहता है। इस विषय में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वही व्यक्ति जीवन में प्रसन्न रह सकता है, जो अपनी तुलना दूसरों से नहीं करता। खुश रहने का मूल मंत्र यही है कि आप जैसे हैं, वैसे ही खुद को स्वीकार करें।

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    नहीं सताएगा कोई भी दुख

    गीता का उपदेश देते समय भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि व्यक्ति को कोई भी काम नि:स्वार्थ भाव से काम करना चाहिए। यानी आपको कोई भी काम बिना फल की इच्छा के करना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस सीख को अपने जीवन में उतार लेते हैं, तो दुख का जीवन में कोई स्थान नहीं रह जाएगा।

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    खुश नहीं रहते ऐसे व्यक्ति

    जो बीत चुका है, उसपर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसे में जो व्यक्ति अतीत के बारे में सोचता रहते है, वह जीवन में कभी सुखी नहीं हो सकता। इस विषय में गीता में कहा गया है कि अगर आप अतीत की स्मृतियों को अपने साथ लेकर चलते रहेंगे, तो जीवन में कभी खुश नहीं रह पाएंगे। इसलिए जितना जल्दी हो सके अतीत को भूलकर जीवन में आगे बढ़ें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।