क्या आप भी करते हैं ये 4 गलतियां? रामायण के अनुसार इन आदतों से खो सकता है मान-सम्मान
रामायण में ऐसी चार आदतों का उल्लेख है, जो व्यक्ति को मान-सम्मान और उन्नति से वंचित कर सकती हैं। इन अवगुणों को त्यागकर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता और आदर प्राप्त कर सकता है।

रामायण के अनुसार ये 4 आदतें आपको सम्मान से कर सकती हैं दूर (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में कई ऐसी बातें बताई गई हैं जिनका अनुसरण करने से व्यक्ति को उन्नति मिलती है। ऐसे ही कुछ प्रसंगों का उल्लेख भी है जो ये बताते हैं कि मनुष्य के भीतर मौजूद कई ऐसे अवगुण हैं जो उनकी प्रगति रोक सकते हैं।
यही नहीं इनसे मनुष्य मान-सम्मान खो देता है और उनसे छोटे या बड़े कोई भी लोग उनका मान नहीं करते हैं। अगर आपमें भी ऐसे कोई भी अवगुण मौजूद हैं, तो इनसे परेशान होने के बजाय आपको तुरंत ही इन आदतों को बदल देना चाहिए।
यदि रामायण के कुछ प्रसंगों को ध्यान में रखते हुए आप अपनी बुरी आदतों को त्याग देंगे तो आपकी उन्नति निश्चित है। आइए यहां जानें इसके बारे में विस्तार से।
सदाचार का पालन न करना
रामायण में रावण के अहंकार को दिखाते हुए एक चौपाई है जिसमें यह बताया गया है कि राम से विमुख होकर धर्म, सदाचार, सत्य और ईश्वर के मार्ग से दूर रहने वाले मनुष्य की संपत्ति, ऐश्वर्य, धन-दौलत, सत्ता और अधिकार ज्यादा दिनों तक नहीं ठहरता है और नष्ट हो जाता है। यह चौपाई- 'राम बिमुख संपति प्रभुताई। जाइ रही पाई बिनु पाई॥' है। यदि आपके भीतर भी ऐसे अवगुण हैं और आप प्रभु श्री राम का ध्यान नहीं करते हैं तो जल्द ही आप दूसरों के बीच सम्मान खोने लगते हैं।
अपनी बातों से पलट जाना
रामायण में एक चौपाई में बताया गया है कि -'रघुकुल रीति सदा चली आई। प्राण जाए पर बचन न जाई॥' इसका मतलब है कि रघुकुल की परंपरा सदियों से चली आ रही है कि भले ही व्यक्ति के प्राण क्यों न चले जाएं, लेकिन उसे अपने वचनों का पालन जरूर करना चाहिए।
यदि किसी मनुष्य में यह अवगुण होता है कि वो अपने वचन नहीं निभाता है और अपनी बातों से पलट जाता है तो वो ना चाहते हुए भी दूसरों के सामने अपना सम्मान खो देता है।
परोपकार न करना और दूसरों को दुख पहुंचाना
रामायण की चौपाई के अनुसार 'परहित सरिस धरम नहि भाई। पर पीड़ा सम नहि अधमाई॥' जिसका अर्थ है परोपकार के बराबर कोई धर्म नहीं है और दूसरों को दुख पहुंचाने के बराबर कोई पाप नहीं है। यदि कोई व्यक्ति परोपकार नहीं करता है और दूसरों को बिना वजह दुःख पहुंचाता है तो दूसरे लोग उसका सम्मान करना कम कर देते हैं। इस वजह से ही आपको हमेशा परोपकार करते रहना चाहिए जिससे आपको अच्छे परिणाम मिलें।
क्रोध और लोभ करना
रामायण में बताया गया है कि 'काम क्रोध मद लोभ सब, नाथ नरक के पंथ।सब परिहरि रघुबीरहि, भजहु भजहिं जेहि संत॥' इसका मतलब यह हुआ कि काम, क्रोध, मद और लोभ ऐसे अवगुण हैं जो किसी व्यक्ति को सीधे नर्क तक पहुंचाते हैं। मनुष्य को इन सभी अवगुणों को त्यागकर प्रभु श्री राम का स्मरण करते रहना चाहिए। अगर आपके भीतर भी ऐसे अवगुण मौजूद हैं तो आपको इन्हें तुरंत त्याग देना चाहिए, क्योंकि ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में मान-सम्मान खो देते हैं और पतन की ओर चले जाते हैं।
अगर आपके भीतर भी यहां बताई आदतें हैं जिसकी वजह से आप दूसरों के बीच मान-सम्मान खो बैठे हैं, तो इन्हें आज ही त्याग दें।
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