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    बल ही नहीं बुद्धि के भी सागर हैं बजरंगबली, चिरंजीवी हनुमान से जुड़े 5 मिथक

    Updated: Fri, 26 Jun 2026 02:00 PM (IST)

    भगवान हनुमान से जुड़े 5 बड़े मिथकों को उजागर करता है, जो उनकी शक्ति, भक्ति और रामायण व महाभारत दोनों में उनकी उपस्थिति को स्पष्ट करता है। ...और पढ़ें

    हनुमान जी से जुड़े 5 सबसे बड़े मिथक (AI Image)

    हनुमान जी से जुड़े 5 सबसे बड़े मिथक (AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कलियुग के देवता हनुमान भगवान राम के परम भक्त माने जाते हैं। हनुमान जी का जन्म वानर वंश से जुड़ा है। पवन के देवता वायु और मां अंजनी के लाल के रूप में पूजे जाने वाले हनुमान सच्ची भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण के सर्वोच्च रूप को दर्शाते हैं।

    रामायण और महाभारत काल में अपनी अहम भूमिका निभाने के साथ उनसे जुड़ी कई ऐसे मिथक हैं, जिनपर कई लोग विश्वास करते हैं। आइए जानते हैं हनुमान जी से जुड़े  सबसे बड़े मिथक के बारे में।

    पहला मिथक

    हनुमान जी सिर्फ रामायण में ही दिखाई देते हैं।

    सच्चाई- हनुमान जी ने रामायण और महाभारत काल दोनों में ही अपनी अहम भूमिका निभाई थी। महाभारत काल में हनुमान जी की भीम से मुलाकात, अर्जुन के अहंकार की परीक्षा और कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान अर्जुन रथ के झंडे पर उनकी छवि इस बात की ओर संकेत करती है कि, उनकी उपस्थिति हर युग में मौजूद है।

    दूसरा मिथक

    हनुमान जी केवल बल के ही देवता हैं।

    सच्चाई- हनुमान जी अपार बल के साथ बुद्धि के भी देवता है। रामायण और महाभारत काल में ऐसे कई प्रसंग हैं, जहां उन्होंने बल से नहीं बल्कि अपने विवेक से काम लिया। हिंदू धर्म ग्रंथों में उन्हें सबसे विद्वान माना जाता था। हनुमान चालीसा से जुड़ी इस चौपाई में उनके ज्ञान के बारे में कहा गया है कि,

    जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
    जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

    अर्थात्- हे ज्ञान और गुणों के सागर श्री हनुमान जी, आपकी जय हो। हे कपीश्वर (वानरों के ईश्वर) आपकी जय हो। आपकी कीर्ति तीनों लोक में विद्यमान है।

    तीसरा मिथक

    हनुमान जी का सबसे बड़ा गुण उनकी शक्ति थी।

    सच्चाई- उनकी सबसे बड़ी ताकत शक्ति नहीं, बल्कि भक्ति थी। श्रीराम की सेवा में समर्पित उन्होंने के हृदय में भी श्रीराम का वास है। चाहे सीता जी के लिए समुद्र पार करके लंका जाना हो या लक्ष्मण के प्राण बचाने हो। प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण की भावना उनकी भक्ति को दर्शाती है। राम भक्त हनुमान इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है।

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    चौथा मिथक

    हनुमान जी सिर्फ एक समुदाय या परंपरा से जुड़े हैं।

    सच्चाई- हनुमान जी भारत समेत पूरी दुनिया में अलग-अलग परंपराओं में पूजनीय है। उनकी शक्ति, भक्ति, विनम्रता, सेवा और समर्पण का भाव सभी समुदाय और परंपरा से जुड़े लोगों को प्रेरित करता है।

    पांचवां मिथक

    हनुमान जी कहानी रामायण के साथ खत्म हो गई।

    सच्चाई- हनुमान जी उन चिरंजीवियों में शामिल है, जो आज भी पृथ्वी पर वास करते हैं। श्रीराम के वचनों का पालन करते हुए कलयुग के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। उनसे ही समय शुरू होता है और उनपर ही खत्म है।

    माना जाता है कि, कलयुग के अंत तक हनुमान जी अपने शरीर में रहेंगे। वे आज भी पृथ्वी पर विचरण करते हैं। धर्म की रक्षा के लिए अमरता का वरदान आज भी उनके भक्त और धर्म की रक्षा कर रहा है।

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