हनुमान अंश का वायरल भजन: 'जब जिद पर आ गई पार्वती' के पीछे छिपी है यह पौराणिक कथा
हनुमान अंश फिल्म का वायरल भजन 'जब जिद पर आ गई पार्वती...' माता पार्वती के भगवान शिव को पति रूप ...और पढ़ें
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'हनुमान अंश' फिल्म पार्वती भजन का अर्थ (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हनुमान अंश फिल्म सुपरहिट तो है ही, लेकिन फिल्म से जुड़े गाने भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। इस फिल्म का सबसे वायरल भजन 'जब जिद पर आ गई पार्वती, समझाने पहुंचे सप्तऋषि...' तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जबरदस्त ट्रेंड कर रहा है।
इस गाने को साधु तिवारी ने गाया है, जिस पर अबतक लाखों रील्स भी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर पार्वती माता किस बात की जिद कर रही थी, जिसे समझने के लिए सप्तऋषि उनके पास पहुंचे थे? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा।
'हनुमान अंश' फिल्म का यह वायरल भजन बुंदली भाषा से जुड़ा भजन है, जो माता पार्वती के अटूट संकल्प और भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए इच्छा शक्ति को दर्शाता है। इस गाने के पीछे एक पौराणिक कथा है।
माता पार्वती और सप्त ऋषियों से जुड़ी पौराणिक कथा
शिव महापुराण और श्री रामचरितमानस के 'बालखण्ड' अध्याय में बताया गया है कि, जब माता सती के देह त्याग के बाद उनका जन्म पर्वतराज हिमालय और मैनावती के घर में पार्वती के रूप में हुआ था। मां पार्वती बचपन से ही शिव भक्ति के प्रति समर्पण थी। तब नारद जी पर्वतराज हिमालय के घर जाकर उन्हें बताया था कि माता सती का पुर्नजन्म मां पार्वती के रूप में हुआ है और भविष्य में उनका विवाह शिव से होना तय है।
इसके बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या शुरू कर दी। अपनी तपस्या को प्रबल बनाने के लिए माता पार्वती ने धीरे-धीरे अन्न और जल भी त्याग दिया था। उनकी कठिन तपस्या ने देवलोक को भी हिलाकर रख दिया था।

सप्त ऋषि पहुंचे माता पार्वती के पास
माता पार्वती की कठिन तपस्या को देखकर सप्त ऋषि उनसे मिलने पहुंचे। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, सप्त ऋषि भगवान शंकर के आदेश पर माता पार्वती की परीक्षा लेने पहुंचे थे। वह देखना चाहते थे कि शिव को प्राप्त करने के लिए पार्वती का संकल्प कितना अटल है।
सप्त ऋषि अपनी योजना के मुताबिक माता पार्वती के पास पहुंचकर भगवान शिव के रूप, वेशभूषा, रहन-सहन और जीवनशैली के बारे में बताने लगे, ताकि यह सब सुनकर माता पार्वती का मन बदल जाए।
सप्त ऋषियों ने कहा कि, भोले नाथ के गले में सांप, सिर पर गंगा, उनके पास आपको रखने के लिए अच्छा घर भी नहीं है और उनके शरीर पर हमेशा भस्म लगी रहती है। हनुमान अंश के वायरल भजन 'पार्वती' में इन्हीं सब बातों का जिक्र किया गया है। सप्त ऋषियों का भरोसा था कि, शिव के कठिन और तपस्वी जीवन के बारे में सुनकर माता पार्वती का मन बदल जाएगा।
लेकिन हुआ इसका उल्टा। सप्त ऋषि की बातों को सुनने के बाद भी माता पार्वती का मन नहीं बदला। उन्होंने ऋषियों से विनम्रतापूर्वक कहा कि, उन्होंने मन से भगवान शिव को अपना पति मान लिया है और वह शिव के अलावा किसी और से विवाह करने के बारे में सोच भी नहीं सकती है।
मैंने शिव को पति के रूप में स्वीकार कर लिया है। वह जब तक शिव को पति के रूप में प्राप्त नहीं कर लेंगी, तब तक उनकी तपस्या ऐसे ही जारी रहेगी, चाहे उन्हें इसके लिए अगला जन्म ही क्यों न लेना पड़े। इसके बाद सप्त ऋषि को यह बात समझ आ गई कि माता पार्वती का संकल्प अटूट है।
आखिरकार मां पार्वती की तपस्या और अटूट समर्पण से भगवान शिव काफी प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में प्राप्त करने का वरदान दिया।
सप्त ऋषि कौन थे?
हिंदू धर्म और पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, सप्त ऋषि 7 महान ऋषियों का एक पवित्र समूह था, जिन्हें सृष्टि के संचालन, धर्म की रक्षा और ज्ञान प्रसार करने का दायित्व दिया गया था। इनमें वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज ऋषि शामिल थे।
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