भारत के 7 ऐसे रहस्यमयी मंदिर, जहां किसी प्रतिमा की नहीं बल्कि किसी 'प्राकृतिक स्वरूप' की होती है पूजा
भारत में ऐसे 7 रहस्यमयी मंदिर हैं जहां देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की बजाय प्राकृतिक स्वरूपों की पूजा की जाती है। ...और पढ़ें

इन अद्भुद मंदिरों से जुड़ी हैं धार्मिक कथाएं। (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भारत एक बहुत ही समृद्ध देश है। खासतौर पर हिंदू धर्म से जुड़े यहां सैकड़ों तीर्थ हैं। इन तीर्थों में से कुछ ऐसे भी हैं, जहां पर किसी भी विशेष मूर्ति की पूजा नहीं होती है, बल्कि प्राकृतिक स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह बहुत ही रहस्यमयी मंदिर हैं और इससे जुड़ी कथाएं भी बहुत रोचक हैं। चलिए आज हम आपको ऐसे ही कुछ मंदिरों के बारे में बताते हैं।
कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर
केरल के त्रिशूर जिले में मौजूद कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर बहुत ही प्राचीन है। यहां देवी की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक गर्भगृह में एक गुप्त कुंड है, जिसे स्थानीय लोग बहुत पवित्र मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं। इस कुंड को हमेशा ढककर रखा जाता है।
ज्वाला देवी मंदिर
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बहुत प्रसिद्ध ज्वाला देवी मंदिर है। इस मंदिर में भी किसी भगवान की मूर्ति की पूजा नहीं होती है। यहां पर अनंत काल से नौ प्राकृतिक ज्वाला की ज्योत जल रही हैं। इन्हीं को देवी के नौ स्वरूप मानकर इनकी पूजा की जाती है। यहां जल रही ज्योतियों को जलाए रखने में न तो कोई ईंधन का इस्तेमाल किया गया है न ही तेल और घी का, यह प्राकृतिक रूप से जल रही हैं।
कामाख्या देवी मंदिर
असम के गुवाहाटी में मौजूद कामाख्या देवी मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस स्थान पर देवी सती की योनि गिरी थी। इस मंदिर में भी कोई मूर्ति नहीं है। यहां पर एक चट्टान है, जिसने योनि का आकार लिया हुआ है। मान्यता है कि यह चट्टान हमेशा पानी से भीगी रहती है और साल में कुछ दिनों के लिए यहां से लाल रंग का पानी निकलता है, तब माना जाता है कि देवी के महावारी चलती है। 52 शक्तिपीठों में से यह भी एक शक्तिपीठ ही है।

(Picture Credit- AI Generated)
अमरनाथ गुफा मंदिर
अमरनाथ गुफा मंदिर में साल में कुछ वक्त के लिए हिम के शिवलिंग बनते हैं और यह कुछ ही दिन दिखकर विलुप्त हो जाते हैं। बर्फ से निर्मित शिवलिंग को बाबा बर्फानी कहा जाता है। यहां भी कोई अन्य मूर्ति नहीं है।
अंबाजी मंदिर
गुजरात के बनासकांठा में अंबाजी मंदिर है। यह भी एक शक्तिपीठ है और यहां पर भी देवी की कोई प्रतिमा नहीं है। यहां पर 'श्री बीस यंत्र' की पूजा की जाती है। इस यंत्र में भक्त देवी की छवि देखते हैं।

(Picture Credit- AI Generated)
कालिनाथ मंदिर
इसे कालीमठ मंदिर भी कहा जाता है। यह बहुत ही रहस्यमयी प्राचीन शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित है और यहां पर भी किसी देवी की प्रतिमा की जगह श्री यंत्र की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां देवी काली धरती के अंदर समा गई थीं।
अचलेश्वर महादेव मंदिर
माउंट आबू की पहाडि़यों में स्थित यह मंदिर राजस्थान के अचलगढ़ में है। इसे अचलेश्वर महादेव मंदिर कहा जाता है, मगर यहां न तो शिव जी की कोई प्रतिमा है और न ही कोई शिवलिंग। यहां पर एक कुंड है, जिसे शिव जी के अंगूठे का चिन्ह कहा जाता है।भक्त इस चिन्ह की यहां पूजा करते हैं।
यह भी पढ़ें- हरसिद्धि माता मंदिर: बेहद रहस्यमयी है उज्जैन का ये शक्तिपीठ, जहां गिरी थी माता सती की कोहनी
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
