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    आखिर क्यों अपनी ही शक्तियां भूल गए थे पवनपुत्र? पढ़ें वो एक श्राप जिसने बदल दी रामायण की कहानी

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 03:00 PM (IST)

    हनुमान जन्मोत्सव पर जानें बजरंगबली के जीवन का वो रहस्य, आखिर ऋषियों ने उन्हें अपनी शक्तियां भूलने का श्राप क्यों दिया और किन देवताओं ने उन्हें बनाया स ...और पढ़ें

    Hanuman Janmotsav 2026: बजरंगबली को देवताओं से मिले वरदानों का रहस्य (Image Source: AI-Generated)

    Hanuman Janmotsav 2026: बजरंगबली को देवताओं से मिले वरदानों का रहस्य (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Janmotsav 2026) हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल यह पावन पर्व आज 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के ही दिन बजरंगबली का जन्म हुआ था। उन्हें बचपन से ही कई सिद्धियां और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त थीं। उनके पास असीम शक्तियां थीं। वे पहाड़ उठा सकते थे, समुद्र लांघ सकते थे और सूरज को निगल सकते थे।

    लेकिन, क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब वे अपनी इन शक्तियों को पूरी तरह भूल गए थे? आज हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन मौके पर, चलिए जानते हैं कि कैसे बजरंगबली अपनी ही शक्तियों को भूल गए थे। साथ ही, ये भी जानेंगे कि उन्हें किन देवी-देवताओं से वरदान प्राप्त हुआ था।

    यहां पढ़ें पौराणिक कथा

    माता सीता का हरण हो चुका था और भगवान राम की वानर सेना उन्हें खोजते-खोजते विशाल समुद्र के किनारे आ पहुंची थी। सामने अथाह सागर था और वानर सेना की उम्मीदें टूटने लगी थीं। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इस विशाल समुद्र को पार करके लंका कैसे पहुंचा जाए।

    तभी वहां सेना के सबसे वयोवृद्ध और ज्ञानी जामवंत जी आगे आए। उनकी नजर चुपचाप बैठे रामभक्त हनुमान पर गई। जामवंत जी जानते थे कि इस पूरी सेना में केवल एक ही योद्धा है जो इस समुद्र को लांघ सकता है और वो हैं स्वयं हनुमान जी। लेकिन, हनुमान जी अपनी शक्तियां भूल चुके थे। तब जामवंत जी ने उन्हें उनके जन्म और उन भूली हुई दिव्य शक्तियों की याद दिलाई।

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    क्यों अपनी शक्तियां भूल गए थे हनुमान जी? (सूर्य को निगलने की कथा)

    जामवंत जी ने कथा सुनाते हुए कहा, "हे पवनपुत्र! आप माता अंजना और वानरराज केसरी के पुत्र हैं। जन्म से ही आपके भीतर देवताओं की असीम शक्तियां थीं।"

    बचपन में बाल हनुमान बहुत ही नटखट और शरारती थे। एक दिन उन्हें बहुत तेज भूख लगी। उन्होंने आसमान में चमकते हुए लाल सूर्य को देखा और उसे कोई मीठा और रसीला फल समझ लिया। अपनी अद्भुत शक्तियों के बल पर वे उड़ान भरकर सूर्य को खाने के लिए अंतरिक्ष में पहुंच गए। अनजाने में ही सही, लेकिन बाल हनुमान (Bal Hanuman) ने अपनी शक्तियों का ऐसा प्रयोग किया जिससे पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया।

    सूर्य वाले प्रसंग के बाद देवताओं ने हनुमान जी को कई वरदान दिए, जिससे वे और भी अधिक शक्तिशाली और चंचल हो गए। वे अक्सर अपनी शक्तियों के नशे में आश्रमों में जाकर तपस्या कर रहे ऋषि-मुनियों को परेशान करने लगे। उनकी इन रोज-रोज की शरारतों से तंग आकर भृगु और अंगिरा वंश के ऋषि-मुनियों ने उन्हें श्राप दिया कि, "तुम अपनी जिन शक्तियों पर इतना गर्व करते हो, उन्हें भूल जाओगे। ये शक्तियां तुम्हें तभी याद आएंगी, जब कोई तुम्हें तुम्हारे वास्तविक बल और महानता का स्मरण कराएगा।"

    जामवंत जी ने हनुमान जी से कहा- "का चुप साधि रहेहु बलवाना!" (हे बलवान! तुम चुप क्यों बैठे हो?)। जैसे ही जामवंत जी ने उन्हें राम काज (भगवान राम के काम) के लिए उनकी शक्तियों की याद दिलाई, हनुमान जी का श्राप टूट गया। उन्हें अपना खोया हुआ बल याद आ गया। देखते ही देखते उनका शरीर पर्वत के समान विशाल हो गया और वे 'जय श्रीराम' का उद्घोष करते हुए एक ही छलांग में समुद्र पार कर लंका की ओर उड़ चले।

    Ramayan

    (Image Source: AI-Generated)

    किन देवताओं ने दिए थे कौन से वरदान?

    जब हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की थी। इसके बाद वायु देव क्रोधित हो गए और सृष्टि की वायु रोक दी। तब ब्रह्मा जी समेत सभी देवताओं ने हनुमान जी को जीवित किया और उन्हें कई दिव्य वरदान दिए:

    ब्रह्मा जी: किसी भी अस्त्र-शस्त्र से वध न होने का वरदान और इच्छानुसार रूप बदलने की शक्ति दी।

    इंद्र देव: हनुमान जी का शरीर वज्र के समान शक्तिशाली बना दिया, जिस पर किसी प्रहार का असर न हो।

    सूर्य देव: अपने तेज का सौवां हिस्सा दिया और उन्हें सभी शास्त्रों का परम ज्ञाता बनाया।

    यम देव: यम के दंड का उनपर कोई प्रभाव नहीं होगा और वह ताउम्र उमर रहेंगे।

    वरुण देव: वरुण देव ने बजरंगबली को पाश और जल से हमेशा सुरक्षित का आशीर्वाद दिया।

    क्या कहते हैं शास्त्र?

    हनुमान जी के बचपन के इस श्राप और देवताओं से मिले वरदानों का वर्णन मुख्य रूप से 'वाल्मीकि रामायण' के उत्तर कांड में मिलता है। इसके अलावा, 'रामचरितमानस' के किष्किंधा कांड में भी उस दृश्य का बहुत सुंदर उल्लेख है, जहां जामवंत जी हनुमान जी को उनकी शक्तियों की याद दिलाते हैं।

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