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    आज हनुमान जन्मोत्सव पर करें संकट मोचन की ये आरती, दूर होंगे शनि-मंगल के दोष

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 09:15 AM (IST)

    हनुमान जन्मोत्सव के दिन सच्ची भक्ति के साथ पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है। इस बार यह महापर्व 02 अप्रैल यानी आज के दिन मनाया जा रहा है। यहां पढ़ ...और पढ़ें

    Hanuman Janmotsav 2026: बजरंगबली की आरती (Image Source: AI-Generared)

    Hanuman Janmotsav 2026: बजरंगबली की आरती (Image Source: AI-Generared)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज 2 अप्रैल 2026, गुरुवार का दिन पूरे देश के लिए बेहद खास है। आज पवनपुत्र, संकट मोचन भगवान हनुमान का पावन जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। कलयुग के जाग्रत देवता माने जाने वाले बजरंगबली की भक्ति का यह दिन शक्ति, सेवा और अटूट विश्वास का प्रतीक है।

    मान्यता है कि आज के दिन जो भक्त पूरी श्रद्धा के साथ महादेव के 11वें रुद्रावतार की आराधना करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, भय और बीमारियां कोसों दूर भाग जाती हैं। हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर प्रभु की भव्य आरती करने का विशेष महत्व है।

    घर पर कैसे करें बजरंगबली की पूजा और आरती?

    अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो सबसे पहले हनुमान जी की प्रतिमा के सामने शुद्ध देसी घी या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। उन्हें लाल फूल और सिंदूर अर्पित करें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ मिलकर ढोल, मंजीरे या शंख की ध्वनि के साथ हनुमान जी की आरती गाएं।

    हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics)

    आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

    जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

    अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।

    दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।।

    लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।।

    लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।।

    लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।।

    पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।।

    बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।।

    सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।।

    कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।।

    लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।

    ।।भगवान राम की आरती।। (Shri Ramchandra Ji Aarti)

    श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।

    नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

    कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।

    पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

    भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।

    रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

    Hanuman puja

    (Image Source: AI-Generated)

    सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।

    आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

    इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।

    मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

    मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।

    करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

    एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।

    तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

    दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।

    मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

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