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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज पर अवश्य करें इस चमत्कारी स्तोत्र का पाठ, अखंड रहेगा आपका सौभाग्य

    Updated: Fri, 06 Sep 2024 08:36 AM (GMT+05:30)

    हरतालिका तीज का हिंदुओं के बीच बड़ा महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत इस साल 06 सितंबर यानी आज रखा जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन का उपवास ...और पढ़ें

    Hartalika Teej 2024: श्री उमा महेश्वर स्तोत्र का पाठ।
    Hartalika Teej 2024: श्री उमा महेश्वर स्तोत्र का पाठ।

    HighLights

    1. हरतालिका तीज का हिंदुओं के बीच बड़ा महत्व है।
    2. यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन प्रतीक है।
    3. हरतालिका तीज का शुभ त्योहार आज यानी 06 सितंबर को मनाया जा रहा है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हरतालिका तीज का शुभ त्योहार आज यानी 06 सितंबर, 2024 को मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन प्रतीक है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना लेकर शिव-पार्वती की आराधना करती हैं। साथ ही उनके लिए कठिन उपवास का पालन करती हैं।वहीं, (इस दिन Hartalika Teej 2024) ''श्री उमा महेश्वर स्तोत्र'' का पाठ परम कल्याणकारी माना गया है, जिसका पाठ करने से शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही सभी बिगड़े काम बन जाते हैं, तो आइए यहां पढ़ते हैं।

    ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥

    नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां

    परस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् ।

    नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां सरसोत्सवाभ्यां

    नमस्कृताभीष्टवरप्रदाभ्याम् ।

    नारायणेनार्चितपादुकाभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां वृषवाहनाभ्यां

    विरिञ्चिविष्ण्विन्द्रसुपूजिताभ्याम् ।

    विभूतिपाटीरविलेपनाभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥ ॥

    नमः शिवाभ्यां जगदीश्वराभ्यां

    जगत्पतिभ्यां जयविग्रहाभ्याम् ।

    जम्भारिमुख्यैरभिवन्दिताभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां परमौषधाभ्यां

    पञ्चाक्षरीपञ्जररञ्जिताभ्याम् ।

    प्रपञ्चसृष्टिस्थितिसंहृताभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यामतिसुन्दराभ्यां

    अत्यन्तमासक्तहृदम्बुजाभ्याम् ।

    अशेषलोकैकहितङ्कराभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां कलिनाशनाभ्यां

    कङ्कालकल्याणवपुर्धराभ्याम् ।

    कैलासशैलस्थितदेवताभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यामशुभापहाभ्यां

    अशेषलोकैकविशेषिताभ्याम् ।

    अकुण्ठिताभ्यां स्मृतिसम्भृताभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां रथवाहनाभ्यां

    रवीन्दुवैश्वानरलोचनाभ्याम् ।

    राकाशशाङ्काभमुखाम्बुजाभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां जटिलन्धराभ्यां

    जरामृतिभ्यां च विवर्जिताभ्याम् ।

    जनार्दनाब्जोद्भवपूजिताभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां विषमेक्षणाभ्यां

    बिल्वच्छदामल्लिकदामभृद्भ्याम् ।

    शोभावतीशान्तवतीश्वराभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    नमः शिवाभ्यां पशुपालकाभ्यां

    जगत्रयीरक्षणबद्धहृद्भ्याम् ।

    समस्तदेवासुरपूजिताभ्यां

    नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥॥

    स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं शिवपार्वतीभ्यां

    भक्त्या पठेद्द्वादशकं नरो यः ।

    स सर्वसौभाग्यफलानि

    भुङ्क्ते शतायुरान्ते शिवलोकमेति ॥॥

    ॥ इति श्री शङ्कराचार्य कृत उमामहेश्वर स्तोत्रम ॥

    आद्य गुरु शंकराचार्य रचित उमा महेश्वर स्तोत्र

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।