मृतक की अस्थियां घर में कितने दिनों तक रखी जा सकती हैं? गरुड़ पुराण में छिपा है यह रहस्य
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक की अस्थियां घर में कितने दिन तक रख सकते हैं और उन्हें कैसे विसर्जित करना चाहिए, इसके नियम बताए गए हैं।

गरुड़ पुराण के अनुसार मृतक की अस्थियों से जुड़े नियम (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
गरुड़ पुराण में अस्थि विसर्जन के नियम।
मृतक की आत्मा 13 दिन तक परिवार के साथ रहती है।
अस्थियां 3 से 13 दिन में विसर्जित करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार के कई नियम बताए गए हैं और उनका पालन जरूरी है। जब घर में किसी की मृत्यु होती है तो मृतक के परिवार के लोग सबसे पहले कुछ रिवाजों को निभाते हैं, जिसमें मृत शरीर को स्नान कराने से लेकर नए वस्त्र पहनाना शामिल है।
उसके बाद शव को श्मशान ले जाते हैं और मुखाग्नि देकर दाह संस्कार किया जाता है, लेकिन सभी संस्कार यहीं पूर्ण नहीं होते हैं। चिता की अग्नि जब ठंडी हो जाती है तब अस्थियां इकट्ठी की जाती हैं और उन्हें सही समय पर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है।
इन अस्थियों से जुड़े भी कुछ नियम बनाए गए हैं और इन्हें विसर्जित करने का सही समय और तरीका भी गरुड़ पुराण में लिखा है। आइए आपको बताते हैं कि आप मृतक की अस्थियां कितने दिनों तक अपने घर में रख सकते हैं और उन्हें कैसे विसर्जित करने से मृत आत्मा को मुक्ति मिलती है।
मृतक की अस्थियां क्या होती हैं?
स्कंद पुराण के अनुसार, मृत्यु के समय आत्मा शरीर से निकलती नहीं है। वह 'अतिवाहिक सूक्ष्म शरीर' का रूप ले लेती है। यही नहीं मृतक की आत्मा अपने परिवार के लोगों के बीच ही लगभग 13 दिनों तक रहती है। उसके बाद तेरहवीं संस्कार किया जाता है और आत्मा को मुक्ति मिलती है।
वहीं जब मृतक की अस्थियों की बात की जाती है तो दाह संस्कार के कुछ समय बाद लगभग दूसरे दिन तक चिता की अग्नि पूर्ण रूप से शांत हो जाती है और मृत शरीर की कुछ अस्थियां ही बचती हैं जो राख का रूप ले लेती हैं। इन अस्थियों को एक तांबे या मिट्टी के लोटे में इकठ्ठा किया जाता है और पूरे नियमों के साथ नदी में प्रवाहित किया जाता है। मृतक की अस्थियां इकठ्ठा करने का समय एक से तीन दिन तक होता है।
मृतक की अस्थियां कैसे इकट्ठी की जाती हैं?
इसे भी एक रस्म के रूप में ही देखा जाता है और इसमें परिवार के सभी मुख्य सदस्य श्मशान घाट जाते हैं और राख के साथ अस्थियों के बड़े टुकड़ों को मिट्टी के नए बर्तन या कुछ परंपराओं में बांस की लकड़ियों का इस्तेमाल करके इकट्ठा किया जाता है। इन अस्थियों को इकट्ठा करने से पहले, कभी-कभी राख पर दूध और पानी डाला जाता है जिससे अग्नि पूरी तरह शांत हो जाती है और ये शुद्धिकरण की अंतिम प्रक्रिया होती है।
कितने समय बाद अस्थियों को विसर्जित करना चाहिए?
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृतक की अस्थियों को अंतिम संस्कार के तीन दिन बाद से लेकर तेरहवें दिन के बीच में कभी भी विसर्जित किया जा सकता है। अस्थियों को यदि गंगा नदी में विसर्जित किया जाता है, तो यह मोक्ष का सबसे आसान रास्ता माना जाता है। अस्थि विसर्जन के बाद मृतक का उनके परिवार के प्रति लगाव पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।
अंतिम संस्कार की रस्मों में से एक अस्थियों को नदी में विसर्जित करना है। मृतक के परिवार के लोगों को सही समय पर ही अस्थियां विसर्जित करने की सलाह दी जाती है।
यह भी पढ़ें- सुहागिन स्त्रियों का अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है? गरुड़ पुराण में लिखे हैं ये नियम
यह भी पढ़ें- मृत्यु के बाद यदि किसी व्यक्ति की तेरहवीं न की जाए तो क्या होता है? गरुड़ पुराण में बताए गए नियम जानें
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
