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क्या मृत्यु के बाद आत्मा अपने परिवार को देखती है? गरुड़ पुराण में लिखे इस रहस्य को जानें

Published: Tue, 18 Aug 2026 02:31 PM (GMT+05:30)

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत शरीर नहीं छोड़ती, बल्कि 13 दिनों तक परिवार के आस-पास रहती है और उन्हें देखती-सुनती है।

मृत्यु के बाद आत्मा का रहस्य: गरुड़ पुराण बताता है (Picture Credit: AI Generated)

मृत्यु के बाद आत्मा का रहस्य: गरुड़ पुराण बताता है (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तब उसके परिवार वालों के लिए अत्यंत कठिन समय होता है। सभी परिजन शोक में डूबे होते हैं और कई बार तो लोग अपने प्रिय की मृत्यु को स्वीकार भी नहीं कर पाते हैं।  

ऐसे में परिवार के लोग कई बार मृतक की उपस्थिति अपने आस-पास महसूस करते हैं। गरुड़ पुराण में किसी व्यक्ति के मृत्यु से जुड़ी कई बातें लिखी हुई हैं और उन नियमों के बारे में भी लिखा है जिनका पालन परिवार के लोगों को करना चाहिए।

क्या आपके मन में भी कभी यह सवाल आया है कि मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? क्या आत्मा तुरंत शरीर को त्यागकर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है? क्या मृतक की आत्मा का संबंध उसके परिवार के लोगों के साथ बना रहता है और एक सबसे अहम सवाल कि क्या मृतक की आत्मा अपने परिवार के लोगों को देख पाती है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर गरुड़ पुराण में विस्तार से मिलता है। आइए आपको बताते हैं इसके बारे में।

आत्मा के लिए गरुड़ पुराण का रहस्य

वास्तव में मृतक की आत्मा अपने परिवार के लोगों को देखती है या नहीं इसके बारे में गरुड़ पुराण में लिखा है कि भगवान विष्णु ने गरुड़ देव को बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु केवल उसके शरीर का अंत है उसकी आत्मा का नहीं।

मृत्यु के बाद व्यक्ति का स्थूल शरीर पंच तत्वों में विलीन हो जाता है, लेकिन आत्मा अपने सूक्ष्म शरीर के साथ आगे की यात्रा शुरू करती है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा अपने शरीर से अलग हो जाती है, लेकिन कुछ समय तक उसे यह विश्वास नहीं होता है कि को मृतक के शरीर को त्याग चुकी है।

इस परिस्थिति में आत्मा को परिवार के लोगों के प्रति मोह का एहसास होता है और वो परिवार के लोगों से बात करना चाहती है। वहीं परिवार के लोग आत्मा को देख नहीं सकते हैं और वो प्रियजन की मृत्यु के विलाप में लगे होते हैं।

मृत्यु के बाद 13 दिनों तक घर पर रहती है आत्मा

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद शरीर से तुरंत निकलकर आत्मा घर और परिवार के लोगों के आस-पास ही मौजूद रहती है। आत्मा अपने परिवार के लोगों को देखती है और उनकी बातें सुनती है।

यही नहीं जब कोई प्रियजन दुखी होता है तब मृतक की आत्मा को भी कष्ट होता है और वो ईश्वर से अपनी मुक्ति की प्रार्थना करती है। ऐसा माना जाता है कि मृत्यु के बाद 13 दिनों तक आत्मा घर में ही मौजूद होती है और जब तेरहवीं संस्कार हो जाता है तब उसे मुक्ति मिलती है।

मृत्यु के बाद के संस्कार जरूरी क्यों हैं?

गरुड़ पुराण बताता है कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिवार के लोग जैसे पत्नी, पुत्र और अन्य रिश्तेदार कुछ विशेष कर्मकांडों को निभाते हैं।

जिसमें मृतक के लिए पिंडदान और श्राद्ध भी हैं। ये सभी संस्कार इसलिए निभाए जाते हैं जिससे मृतक की आत्मा को शांति मिले और उसके लिए आगे की यात्रा आसान हो सके। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को धीरे-धीरे यह समझ आने लगता है कि अब उसका सांसारिक जीवन समाप्त हो चुका है और इसके बाद यमदूत उसे उसके आगे की यात्रा पर ले जाते हैं।

गरुड़ पुराण में मृत शरीर और आत्मा के लिए कई नियम बताए गए हैं और कर्मों के अनुसार ही मनुष्य को उसका फल मिलता है। आत्मा का परिवार के लोगों के साथ मोह भी उस समय तक रहता है जब तक कि उसे शांति नहीं मिल जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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