मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण का पाठ क्यों है जरूरी? इन विशेष बातों का रखें ध्यान
हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण का पाठ महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पाठ आत्मा को शांति प्रदान करने और मोह-माया से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है, जिससे आत्मा को यमलोक की यात्रा में भटकना नहीं पड़ता।
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गरुड़ पुराण पाठ के नियम (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस ग्रंथ में भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच हुआ एक संवाद है। इस दौरान गरुड़ जी ने जगत के पालनहार भगवान विष्णु से यमलोक की यात्रा, नरक, स्वर्ग के बारे में प्रश्न पूछे।
गरुड़ पुराण में व्यक्ति के अंतिम समय और उसके बाद की यात्रा का वर्णन किया गया है। मृत्यु के बाद मृतक की आत्मा तुरंत दूसरा शरीर धारण नहीं करती है। आत्मा 13 दिनों तक अपने घर और परिजनों के आसपास ही भटकती रहती है। इस दौरान गरुड़ पुराण का पाठ किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी की मृत्यु के बाद क्यों किया जाता है गरुड़ पुराण का पाठ? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके पीछे के रहस्य के बारे में।
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(Picture Credit- AI Generated)
क्यों किया जाता है गरुड़ पुराण का पाठ?
आत्मा को शांति- धार्मिक मान्यता के अनुसार, अंतिम सांस लेने के बाद मृतक की आत्मा 13 दिनों तक अपने घर वालों के आसपास ही रहती है। गरुड़ पुराण के पाठ के दौरान मृतक की आत्मा के लिए भी एक आसन रखा जाता है। गरुड़ पुराण का पाठ आत्मा को यमलोक के मार्ग के बारे में बताता है। ऐसा माना जाता है कि इस धार्मिक ग्रंथ का पाठ करने से आत्मा को यमलोक की यात्रा में भटकना नहीं पड़ता है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
मोह-माया से छुटकारा- ऐसा माना जाता है कि गरुड़ पुराण का पाठ करने से आत्मा को इस बात का ज्ञान प्राप्त होता है कि जो पृथ्वी पर जन्म लेता है, तो उसकी मृत्यु निश्चित है। इस ज्ञान से आत्मा सांसारिक मोह का त्याग करती है और अगले जन्म की तरफ बढ़ने के लिए प्रेरित होती है।
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गरुड़ पुराण पाठ के नियम
- गरुड़ पुराण का पाठ दाह संस्कार के बाद से शुरू होता है और तेरहवीं तक चलता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस ग्रंथ का पाठ बिना किसी अन्य कारण नहीं करना चाहिए।
- इसके अलावा इसका पाठ स्वयं नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण का पाठ किसी ब्राह्मण के द्वारा करवाना चाहिए।
- पाठ करते समय ब्राह्मण का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
- गरुड़ पुराण के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए। तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
- गरुड़ पुराण के पाठ के समय परिवार के सभी सदस्यों ब्रह्मचर्य के नियम का पालन करना चाहिए।
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