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पूर्वजों का श्राद्ध न करने पर क्या होता है? गरुड़ पुराण में मिलता है इसका रहस्य

Updated: Thu, 23 Jul 2026 08:00 AM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, पूर्वजों का श्राद्ध कर्म न करने से पितृ दोष लगता है और उनके जीवन में कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। यह कर्म न करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं और उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती, जिससे वंशजों के कार्यों में बाधा आती है।

श्राद्ध न करने के गंभीर परिणाम गरुड़ पुराण में जानें पितृ दोष का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

श्राद्ध न करने के गंभीर परिणाम गरुड़ पुराण में जानें पितृ दोष का रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. श्राद्ध न करने से घर में पितृ दोष लगता है।

  2. पूर्वज नाराज होते हैं, वंशजों के कार्यों में बाधा आती है।

  3. मृतक की आत्मा को शांति और मोक्ष नहीं मिलता।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कई संस्कारों के बारे में बताया जाता है और उनका पालन करने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक है श्राद्ध कर्म।

गरुड़ पुराण में मृतक के लिए कई संस्कारों के बारे में बात की गई है जिसमें श्राद्ध को जरूरी बताया गया है। मुख्य रूप से पितृ पक्ष के 16 दिनों में पूर्वजों के निमित्त तर्पण कार्य किया जाता है।

यह वो पवित्र समय होता है जिसमें श्राद्ध, पिंड दान और तर्पण जैसी रीतियों से पूर्वजों का सम्मान किया जाता है। वहीं कई बार लोग मृतक का श्राद्ध कर्म जरूरी नहीं समझते हैं और इससे जुड़े रीति-रिवाजों को नहीं निभाते हैं। आइए आपको बताते हैं कि पूर्वजों का श्राद्ध न करने से क्या होता है और इसके जीवन में क्या प्रभाव हो सकते हैं।

घर में पितृ दोष लगता है 

ऐसी मान्यता है कि यदि पूर्वजों का श्राद्ध विधि-विधान से नहीं किया जाता है तो उस घर के लोगों पर पितृ दोष लग सकता है। गरुड़ पुराण में पितृ दोष का सबसे बड़ा कारण पितरों यानी पूर्वजों का श्राद्ध कर्म न करने को ही बताया गया है। यही नहीं पितृ दोष लगने पर कई अन्य तरह की समस्याएं भी आने लगती हैं जिनमें से करियर में रुकावट, स्वास्थ्य खराब होना, मेहनत के बाद भी सफलता न मिलना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

पूर्वज हो सकते हैं नाराज

यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध कर्म नहीं करता है तो उसके पूर्वज नाराज हो सकते हैं। श्राद्ध कर्म पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका माना जाता है।

जब परिवार के लोग पितरों के निमित्त श्राद्ध या तर्पण जैसे कर्म नहीं करते हैं तो यह पूर्वजों का अनादर माना जा सकता है। गरुड़ पुराण में पितरों की संतुष्टि के लिए श्रद्धा और विधि से किए गए कर्मों का महत्व बताया गया है और इस कर्म को न करना पूर्वजों की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण।

पूर्वजों की आत्मा को संतुष्टि नहीं मिलती है

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसका श्राद्ध कर्म जरूरी होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार श्राद्ध करने से ही आत्मा को मुक्ति मिलती है और उनके लिए मोक्ष का द्वार खुलता है। इसी कारण से पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म पूर्वजों की शांति के लिए किए जाते हैं। इन कर्मों के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान भी दिखाया जाता है।

वंशजों के कार्यों में बाधा आती है

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब किसी वंशज द्वारा श्राद्ध कर्म नहीं किया जाता है तो उसके जीवन में बेवजह समस्याएं आने लगती हैं।
पितरों की कृपा परिवार की उन्नति और सुख-समृद्धि से जुड़ी होती है। श्राद्ध कर्म न करने से उनके वंशजों को जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आप भी मृतक का श्राद्ध कर्म विधि पूर्वक नहीं करते हैं जीवन में ऐसे ही नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।