'लोग क्या कहेंगे?' इस डर ने मारे हैं सबसे ज्यादा सपने, रामचरितमानस से सीखें इसे हराने का मंत्र
अक्सर 'लोग क्या कहेंगे' का डर बड़े सपनों को रोक देता है, लेकिन रामचरितमानस हमें इससे ऊपर उठकर लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। हनुमान जी के उदाहरण से सीखें कि कैसे बड़े लक्ष्य के सामने छोटी मुश्किलें मायने नहीं रखतीं।

लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगी रामचरितमानस की चौपाई (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हममें से ज्यादातर लोग अपने जीवन में कुछ बड़ा करने चाहते हैं, लेकिन अक्सर एक दिखाई न देने वाला डर हमारे कदमों को रोक लेता है, 'लोग क्या कहेंगे?' सच्चाई तो यह है कि, इस एक वाक्य ने दुनिया में सबसे ज्यादा सपनों को मारा है।
समाज के लोग और उनके मजाक के डर से हम अक्सर अपने लक्ष्यों का दायरा सीमित कर लेते हैं। लेकिन क्या दूसरों की सोच हमारी मंजिल तय कर सकती है?
अगर आप इस सोच के साए में जी रहे हैं और अपने बड़े लक्ष्यों को पूरा करने की इच्छा रखते हैं, तो इसका समाधान आज से सदियों पहले ही गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में बताया था। आइए जानते हैं कि, इस पवित्र ग्रंथ की कौन-सी चौपाई है, जो हमें लोगों की बातों से बेपरवाह होकर अपने बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा प्रदान करती है।
लक्ष्य बड़े रखें मुश्किले छोटी लगेंगी
हिंदू शास्त्रों में कहा गया है कि, जिनका लक्ष्य बड़ा होता है, मुश्किलें उन्हें रोक नहीं सकती है। जब मां सीता की खोज में हनुमान जी जब लंका पहुंचें, तो रावण ने उन्हें बंदी बनाने के लिए अस्त्र चलाया। हनुमान जी चाहते हैं, तो उस बंधन से पल भर में निकल जाते, लेकिन उन्होंने ऐसा करने के बजाय खुद को रस्सियों में बंध जाने दिया। तब भगवान शिव माता पार्वती से रामचरितमान की एक चौपाई कहते हैं कि,
जासु नाम जपि सुनहु भवानी।
भव बंधन काटिं नर ग्यानी
अर्थात्- जिनका नाम जपकर ज्ञानी मनुष्य भी संसार के बंधन को काट डालता है, उनका दूत कहीं बंधन में आ सकता है? लेकिन प्रभु श्रीराम के कार्य के लिए हनुमानजी ने खुद को बंधन में बांध लिया।
लक्ष्यहीन जीवन जीने से बचें
जिस इंसान को पता हो कि, उसे कहां जाना है? तो वो बीच में आने वाली रुकावटों को मुश्किल नहीं मानता है। वो मुश्किल समय में भी चुपचाप अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काम करते चला जाता है।
हनुमान जी का लक्ष्य था रावण के दरबार तक पहुंचना, लंका का जायजा लेना और जो इंसान लक्ष्यहीन जीवन जीता है, उसे छोटी-छोटी मुश्किलें भी पहाड़ जैसी दिखाई देती है। इसलिए लोग क्या कहेंगे? कुछ कर नहीं पाया तो या अगर फेल हो गया तो ऐसी बातों पर ध्यान देने की बजाय अपना संपूर्ण बल, इच्छा शक्ति और ऊर्जा लक्ष्य पर लगाना चाहिए।
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