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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jagannath Rath Yatra 2025: क्यों भगवान जगन्नाथ को लगाते हैं मालपुए का भोग? जानें महत्व

    Updated: Mon, 16 Jun 2025 12:21 PM (IST)

    जगन्नाथ रथ यात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है जो हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को मनाई जाती है। इस नौ दिवसीय यात्रा (Jagannath Rath Yatra 2025) में ...और पढ़ें

    Jagannath Rath Yatra 2025: मालपुए भोग का धार्मिक महत्व।
    Jagannath Rath Yatra 2025: मालपुए भोग का धार्मिक महत्व।

    HighLights

    1. जगन्नाथ रथ यात्रा बहुत पुण्यदायी मानी जाती है।
    2. जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 27 जून से होगी।
    3. यह यात्रा जगन्नाथ बाबा के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे भव्य और महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है। यह पर्व हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इस नौ दिवसीय यात्रा के दौरान (Jagannath Rath Yatra 2025) भगवान को तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं, जिनमें मालपुआ का विशेष स्थान है, तो आइए इसके पीछे का रहस्य जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

    मालपुए का भोग क्यों महत्वपूर्ण है? (Why Malpua Is Offered To Jagannath)

    भगवान जगन्नाथ को मालपुआ बहुत ज्यादा प्रिय है, और यह परंपरा दशकों पुरानी है। रथ यात्रा के दिन, जब भगवान अपने भाई-बहन के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं, तो उन्हें विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाया जाता है। यह मालपुआ केवल रथ यात्रा के दिन ही बनाया जाता है और भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में बांटा जाता है।

    खास बात यह है कि भगवान जगन्नाथ के लिए ये विशेष मालपुए छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से लाकर चढ़ाए जाते हैं।

    मालपुए भोग का धार्मिक महत्व (Malpua Bhog Lord Jagannath)

    • मालपुआ भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।
    • हिंदू धर्म में मालपुआ को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है, किसी भी शुभ काम या त्योहार पर मालपुआ बनाना चढ़ाना शुभ माना जाता है।
    • ऐसा माना जाता है कि मालपुए का भोग भगवान के मन को खुश करता है और उनकी रथ यात्रा मंगलमय होती है। यह यात्रा एक लंबी और महत्वपूर्ण यात्रा है, और इस दौरान भगवान को उनका पसंदीदा भोजन जरूर चढ़ाना चाहिए।
    • भगवान और भक्तों के बीच का संबंध बहुत गहरा है।
    • मालपुआ जैसी पारंपरिक और घर में बनी मिठाई का भोग लगाने से रिश्तों में मधुरता आती है।
    • भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि परंपरा, प्रेम और भक्ति का एक साक्षात उदाहरण है। मालपुए का भोग इस यात्रा का एक अभिन्न अंग है, जो भक्तों की श्रद्धा और भगवान के प्रति उनके गहरे प्रेम को दर्शाता है।
    • इस प्रसाद को पाने के लिए भक्त घंटों भीड़ में खड़े रहते हैं, यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद है।

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