जगन्नाथ रथ यात्रा नियम: पुरी जगन्नाथ यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं? न करें ये गलतियां, रूठ सकते हैं महाप्रभु
जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने वाले भक्तों के लिए कुछ कड़े नियम होते हैं। आइए उन नियमों के बारे में जानते हैं। ...और पढ़ें

Rath Yatra Special: रथ यात्रा के दिन क्या करना सही है और क्या गलत?
HighLights
पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं
इस दौरान महाप्रसाद का अपमान करना महापाप माना जाता है
रथ की रस्सी खींचने का सौभाग्य बहुत पुण्य से मिलता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उड़ीसा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा सनातन धर्म के सबसे बड़े और पवित्र उत्सवों में से एक है। इस पावन अवसर पर खुद महाप्रभु जगन्नाथ,
अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गर्भगृह से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर यात्रा पर निकलते हैं। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस रथ यात्रा में सच्चे मन से शामिल होता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
यह एक बेहद पवित्र यात्रा है, इसलिए इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं। अगर आप भी इस साल पुरी रथ यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं, तो कुछ ऐसी गलतियों के बारे में जरूर जान लें, जिन्हें करने से महाप्रभु नाराज हो सकते हैं।

Picture Credit- AI Generated
भूलकर भी न करें ये गलतियां
- महाप्रसाद का अनादर करना - जगन्नाथ मंदिर के रसोई में बनने वाले महाप्रसाद को साक्षात ब्रह्म माना गया है। यात्रा के दौरान या मंदिर परिसर में अगर कोई आपको यह प्रसाद देता है, तो उसे कभी भी मना न करें। प्रसाद को नीचे गिराना या जूठा छोड़ना महाप्रभु का अपमान माना जाता है।
- रथ खींचते समय घमंड और धक्का-मुक्की - मान्यता है कि जगन्नाथ जी के रथ की रस्सी को छूने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन, रस्सी खींचने की होड़ में अन्य भक्तों को चोट पहुंचाना, गाली-गलौज करना या घमंड करना आपके पुण्यों को खत्म कर देता है। भगवान के दरबार में सभी समान हैं, इसलिए सेवा भाव से आगे बढ़ें।
- चमड़े की वस्तुएं - रथ के बेहद करीब जाते समय चमड़े की बेल्ट, पर्स या जूते-चप्पल जैसी अशुद्ध वस्तुएं अपने पास रखने से बचें। साथ ही, मानसिक और शारीरिक रूप से पूर्ण सात्विकता बनाए रखें, तामसिक भोजन का सेवन करके यात्रा में शामिल न हों।
यात्रा के दौरान क्या करना है शुभ?
- रथ यात्रा के दौरान पूरे समय जय जगन्नाथ या हरे कृष्ण महामंत्र का मन ही मन जाप करते रहें। अपनी वाणी को पवित्र रखें।
- पुरी पहुंचने वाले दूर-दराज के भक्तों, बीमारों या बुजुर्गों की मदद करें। यात्रा में प्यासे श्रद्धालुओं को पानी पिलाना महाप्रभु जगन्नाथ को बेहद प्रिय है।
- जब भगवान अपने मौसी के घर गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं, तो वहां भी मंदिर प्रशासन द्वारा तय किए गए दर्शन के पारंपरिक नियमों और मर्यादाओं का पूरी तरह पालन करें।
पूजन मंत्र
1. नीलाचल निवासाय नित्याय परमात्मने।
बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः॥
2. जगन्नाथ स्वामी नयना पथ गामी भवतु मे॥
यह भी पढ़ें- जब श्रीकृष्ण ने समय को ही रोक दिया, जानें जयद्रथ वध के पीछे का 'मायावी सच'
यह भी पढ़ें: पूजा में कौन-से फल-फूल देवी देवताओं को अर्पित नहीं करना चाहिए? जानें नियम
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।