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क्या आपको पता है श्रीकृष्ण को क्यों पसंद है माखन? पढ़ें भगवान के माखनचोर बनने की असली कथा

Updated: Sat, 22 Aug 2026 11:48 AM (IST)

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग क्यों प्रिय है, यह जानने के लिए उनकी बाल लीलाओं और माखनचोर बनने की कथा को समझना आवश्यक है।

श्रीकृष्ण को अधिक प्रिय है माखन-मिश्री (AI-Generated Image)

श्रीकृष्ण को अधिक प्रिय है माखन-मिश्री (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के पर्व का विशेष महत्व है। यह त्योहार भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में देशभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर बाल गोपाल की पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।

इस दिन पूजा के दौरान कान्हा जी को छप्पन भोग लगाए जाते हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक उन्हें उनका प्रिय भोग माखन-मिश्री अर्पित न किया जाए। क्या आपने कभी सोचा है कि लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री का भोग इतना प्रिय क्यों है? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।

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बालकृष्ण और माखनचोर की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में अवतार लिया था। उनका बचपन गोकुल और वृंदावन में बीता। माता यशोदा श्रीकृष्ण के लिए गाय के दूध को मथकर ताजा सफेद माखन निकालती थीं। भगवान श्रीकृष्ण को माखन अत्यंत प्रिय था। इसलिए वे खूब माखन खाया करते थे। इसके अलावा वे अपने सखाओं के साथ गोपियों के घर जाकर मटकियों से भी माखन चुराकर खाया करते थे। भगवान श्रीकृष्ण की इसी मनमोहक लीला की वजह से उन्हें माखनचोर कहा जाने लगा।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब माखन में मिश्री को मिलाया जाता है, तो भोग मीठा हो जाता है। इस मीठे भोग को अर्पित करने से भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण के भोग में माखन-मिश्री को शामिल करने का विशेष महत्व है। इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि प्रभु को भोग लगाते समय तुलसी दल जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि तुलसी दल के बिना कान्हा जी कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते हैं।

माखन-मिश्री के भोग से प्रसन्न होते हैं लड्डू गोपाल

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग अर्पित करने से प्रभु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इससे घर की दरिद्रता और आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। साथ ही, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीलाओं का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में मिलता है। इसके अलावा विष्णु पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी इसका उल्लेख किया गया है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।