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ज्येष्ठ माह 2026: भीषण गर्मी में पुण्य कमाने का सबसे आसान तरीका, बस करें ये 1 काम

Published: Fri, 01 May 2026 10:15 AM (IST)

ज्येष्ठ माह 2026 में जल दान का विशेष महत्व है। जानें ज्येष्ठ माह कब से शुरू हो रहा है, इसकी ...और पढ़ें

ज्येष्ठ माह 2026 के उपाय (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ अपनी भीषण गर्मी और 'नौतपा' के लिए जाना जाता है। साल 2026 में यह महीना धार्मिक दृष्टि से बहुत खास होने वाला है। इस दौरान सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, इसलिए प्रकृति और जीव-जंतुओं की सेवा का इस महीने में विशेष महत्व बताया गया है।

कब से शुरू हो रहा है ज्येष्ठ माह?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई 2026, शनिवार से हो रही है। हालांकि, प्रतिपदा तिथि 1 मई की रात से शुरू हो जाएगी, लेकिन उदयातिथि के नियम के अनुसार महीना 2 मई से माना जाएगा। इस महीने का समापन 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ होगा।

शुभ संयोग और नक्षत्र

ज्येष्ठ माह के पहले ही दिन कई शुभ योग बन रहे हैं:

व्यतिपात योग: 2 मई की रात 09:45 तक।

विशाखा नक्षत्र: पूरे दिन और रात तक।

त्रिपुष्कर योग: 3 मई की सुबह 05:39 तक रहेगा।

इस दिन चंद्रमा तुला राशि में और सूर्य मेष राशि में विराजमान रहेंगे, जो इस महीने की शुरुआत को ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

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(AI-Generated Image)

बस करें यह एक काम, मिलेगा मोक्ष

ज्येष्ठ के महीने में भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप (वामन अवतार) की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इससे शत्रुओं पर विजय और पापों का नाश होता है। लेकिन, जो लोग कठिन पूजा-पाठ नहीं कर सकते, उनके लिए शास्त्रों में एक बेहद सरल उपाय बताया गया है।

ज्येष्ठ की गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म माना गया है। इसलिए यह महीना जल दान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। आप ये छोटे काम कर सकते हैं:

  • राहगीरों के लिए घर के बाहर मटके में ठंडा पानी रखें।
  • पशु-पक्षियों के लिए मिट्टी के बर्तनों में छत या छांव वाली जगह पर पानी भर कर रखें।
  • प्यासे लोगों को पानी पिलाने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि भगवान विष्णु की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने वाला व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

जल सेवा के अलावा ज्येष्ठ माह के नियम और पुण्य कर्म

दान का महत्व: भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस महीने में तिल, अन्न और सत्तू का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

सात्विक भोजन और स्वास्थ्य: महाभारत के अनुसार, जो व्यक्ति ज्येष्ठ के महीने में दिन में केवल एक समय सात्विक भोजन करता है, वह न केवल रोगों से दूर (निरोग) रहता है, बल्कि उसे धन-धान्य की भी प्राप्ति होती है।

प्रातः काल की दिनचर्या: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और जल के देवता वरुण देव की आराधना करना इस महीने में आध्यात्मिक उन्नति और शुभ फल प्रदान करता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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