Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर दुर्लभ 'शिव योग' समेत बन रहे हैं कई अद्भुत संयोग, बरसेगी महादेव की कृपा

    Updated: Tue, 03 Mar 2026 07:30 PM (GMT+05:30)

    चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान कृष्ण और काल भैरव की पूजा की जाती है। ...और पढ़ें

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, 11 मार्च को मासिक कालाष्टमी (Kalashtami 2026 Date) है। यह पर्व हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव की पूजा की जाती है। साथ ही विशेष कामों में सफलता पाने के लिए उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। तंत्र साधना करने वाले साधक कालाष्टमी पर काल भैरव देव की कठिन साधना करते हैं।

    shiv ji

    ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग बन रहा है। साथ ही कई अन्य मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। आइए, शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-

    कालाष्टमी शुभ मुहूर्त (Kalashtami Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट पर होगी और 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। निशा काल का शुभ मुहूर्त देर रात 11 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट (Kaal Bhairav Puja Muhurat) तक है।


    शिववास योग (Shivvas Yoga Significance)

    ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह की कालाष्टमी पर दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस शुभ योग का संयोग 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट से बन रहा है। वहीं, शिववास योग को समापन 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट तक है। शिववास योग में काल भैरव देव की पूजा करने से दोगुना फल मिलेगा। साथ ही सभी बिगड़े काम बन जाएंगे। इसके साथ ही कालाष्टमी पर सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है। इन योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को शुभ कामों में सफलता और सिद्धि मिलेगी।

    खबरें और भी

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 03 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 05 बजकर 56 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 15 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से 02 बजकर 46 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 54 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक

    यह भी पढ़ें- Kalashtami 2026: कालाष्टमी पर पूजा के समय करें इन चमत्कारी मंत्रों का जप, शत्रु होंगे शांत और हर मुश्किल राह होगी आसान

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।