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    Kalashtami 2026: वैशाख महीने में किस दिन है कालाष्टमी? एक क्लिक में नोट करें शुभ मुहूर्त और संयोग

    Updated: Sun, 08 Mar 2026 07:02 PM (IST)

    सनातन धर्म में कालाष्टमी पर्व का विशेष महत्व है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन काल भैरव देव की पूजा और व्रत करने से सभी सं ...और पढ़ें

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

    Kalashtami 2026: कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान कृष्ण को समर्पित होता है। 

    2. इस दिन काल भैरव देव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। 

    3. शिव जी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। 

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में कालाष्टमी पर्व का खास महत्व है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर काल भैरव देव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही काल भैरव देव के निमित्त व्रत रखा जाता है।

    shiv ji

    धार्मिक मत है कि काल भैरव देव की पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। साथ ही विशेष कामों में सफलता मिलती है। काल भैरव देव बुरी नजरों से भी साधक और उनके परिवार की रक्षा करते हैं। आइए, वैशाख माह की कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-

    कालाष्टमी शुभ मुहूर्त (Masik Kalashtami Rituals)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 09 अप्रैल को रात 09 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 10 अप्रैल को रात 11 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। इसके लिए 09 अप्रैल को वैशाख माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी।

    शिव योग (Shiv Yoga)

    ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख माह की कालाष्टमी पर दुर्लभ शिव और परिघ योग (ShivvasYoga Significance) का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही निशाकाल में शिववास योग का भी संयोग है। इस योग में भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे। शिववास योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को अक्षय फल मिलेगा। साथ ही सभी अटके काम पूरे होंगे। इसके साथ ही कालाष्टमी पर भद्रावास योग का भी संयोग है।

    खबरें और भी

    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 09 बजकर 19 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 43 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 32 मिनट से 05 बजकर 17 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 42 मिनट से 07 बजकर 05 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात 12 बजे से 12 बजकर 45 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।