Shiv-Kamdev Katha: जब कामदेव का 'पुष्प बाण' बना उनकी मौत का कारण, महादेव ने क्यों खोला अपना तीसरा नेत्र?
आखिर क्यों प्रेम के देवता कामदेव को भगवान शिव की समाधि भंग करने के लिए उन पर पुष्प बाण चलाना पड़ा? तारकासुर के आतंक से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए ...और पढ़ें

कामदेव को क्यों चलाना पड़ा शिवजी पर बाण? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान शिव को 'वैरागी' और 'योगेश्वर' माना गया है, जिनकी तपस्या को भंग करना असंभव है। लेकिन, एक समय ऐसा आया जब देवताओं के हित के लिए प्रेम के देवता कामदेव को शिव जी की समाधि पर बाण चलाना पड़ा। इसका परिणाम कामदेव के शरीर के भस्म होने के रूप में निकला। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी और इसके पीछे क्या रहस्य था? आइए जानते हैं।
क्यों चलाना पड़ा कामदेव को बाण?
शिव पुराण के अनुसार, तारकासुर नाम के राक्षस ने चारों ओर कोहराम मचा रखा था। उसे वरदान प्राप्त था कि उसका वध केवल शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकता है। उस समय सती के देह त्याग के बाद महादेव घोर तपस्या में लीन थे। जब तक उनकी तपस्या पूरी नहीं होती और वे माता पार्वती से विवाह नहीं करते, कार्तिकेय का जन्म होना असंभव था।
देवताओं की विनती पर कामदेव इस कठिन कार्य के लिए तैयार हुए। उन्होंने वसंत ऋतु का वातावरण बनाया और शिव जी के मन में प्रेम जगाने के लिए उन पर 'पुष्प बाण' चला दिया।
शिव का क्रोध और कामदेव का अंत
जैसे ही कामदेव का बाण शिव जी को लगा, उनकी समाधि भंग हो गई। अपनी तपस्या में बाधा पड़ने से महादेव अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने अपना तीसरा नेत्र (Third Eye) खोल दिया। तीसरी आंख से निकलने वाली प्रचंड अग्नि ने कामदेव को क्षण भर में जलाकर भस्म कर दिया। कामदेव का शरीर नष्ट हो गया और वे 'अनंग' (बिना शरीर वाले) कहलाए।

(Image Source: AI-Generated)
रति की प्रार्थना और कामदेव का पुनर्जन्म
कामदेव की पत्नी रति ने जब यह देखा, तो वे विलाप करने लगीं। उन्होंने महादेव से क्षमा मांगी। शांत होने पर शिव जी ने बताया कि यह सब सृष्टि के कल्याण के लिए हुआ था। उन्होंने वरदान दिया कि द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण का अवतार होगा, तब कामदेव उनके पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेंगे और रति से उनका पुन: मिलन होगा।
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