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30 जुलाई 2026 कांवड़ यात्रा आरंभ: बिना कांवड़ लाए भी घर पर जलाभिषेक करके पा सकते हैं भोलेनाथ की कृपा

Updated: Wed, 29 Jul 2026 11:53 AM (IST)

30 जुलाई 2026 से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। अगर आप कांवड़ नहीं ला सकते तो चिंता न करें। घर पर विधिपूर्वक जलाभिषेक करके भी भोलेनाथ की कृपा पा सकते हैं। जानें सावन में घर पर पूजा की आसान विधि और नियम।

घर पर जलाभिषेक कर पाएं शिव कृपा । (Picture Credit- AI Generated)

घर पर जलाभिषेक कर पाएं शिव कृपा । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 30 जुलाई 2026 से कांवड़ यात्रा आरंभ हो रही है।इस यात्रा का शिवभक्त पूरे वर्ष इंतजार करते हैं। हालांकि, बहुत से भक्‍त इस यात्रा में हिस्‍सा नहीं ले पाते हैं, मगर उन्‍हें निराश होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि वे लोग घर पर ही नियम का पालन करते हुए विधि-विधान के साथ शिव जी का जलाभिषेक कर सकते हैं।

यदि आप भी इनमें से एक हैं, जो कांवड़ यात्रा का हिस्‍सा बनना तो चाहते थे, मगर बन नहीं पाए तो चलिए आपको बताते हैं कि धार्मिक शास्‍त्रों में घर में शिवलिंग का जलाभिषेक करने की क्‍या सही विधि बताई है।

सही शिवलिंग की का करें जलाभिषेक

धार्मिक शास्त्रों की मानें तो केवल नर्मदेश्वर शिवलिंग का ही जलाभिषेक करना चाहिए। यह शिवलिंग नर्मदा नदी में पाए जाते हैं। इन्हें प्राकृतिक और स्वयं सिद्ध शिवलिंग कहा गया है। इनकी घर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं करनी होती है। इनकी पहचान का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसमें प्राकृतिक त्रिपुंड और रेखाएं होती हैं।

जलाभिषेक की विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्‍त्र पहन लें। शिव जी को सफेद और नीले रंग से अधिक प्रेम है, इसलिए कोशिश करें कि इसी रंग के वस्‍त्र पहनें।
  • इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें।घर के मंदिर में रखे शिवलिंग को साफ स्थान पर स्थापित करें।
  • तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल या गंगाजल भरें। गंगाजल नहीं है, तो किसी भी पवित्र नदी या तालाब का जल भी लोटे में भर सकते हैं।
  • अब "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे शिवलिंग पर जल अर्पित करें। जल चढ़ाने के बाद बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और सफेद चंदन अर्पित करें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हुए शिव जी से अपनी मनोकामना कहें।

अतः सावन में हर दिन शिव जी का जलाभिषेक करना चाहिए। यदि आप किसी भी पवित्र नदी का जल नहीं ला पा रहे हैं, तो साफ जल से भी उनका जलाभिषेक किया जा सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।