विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Karwa Chauth 2026: चंद्रमा को जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है? पढ़ लें सबसे जरूरी नियम

Published: Wed, 28 Oct 2026 06:38 PM (IST)Updated: Thu, 29 Oct 2026 08:49 AM (IST)

करवाचौथ 2026 पर चंद्रमा को अर्घ्य देना सबसे अहम माना जाता है। जानें अर्घ्य देते समय कौन सी एक भूल ...और पढ़ें

चंद्रमा को अर्पित जल की पवित्रता कैसे बनाएं रखें? (Picture Credit- AI Generated)

चंद्रमा को अर्पित जल की पवित्रता कैसे बनाएं रखें? (Picture Credit- AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन सुबह से शाम तक बिना पानी पिए व्रत किया जाता है। शाम को सोलह श्रृंगार करके माता करवा और भगवान शिव-पार्वती की पूजा की जाती है, फिर चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है।चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है, इसलिए अर्घ्य का नियम सबसे अहम माना जाता है।

मान्यता है कि अर्घ्य देते समय जल की धारा या छींटें पैरों पर नहीं पड़नी चाहिए। इसके पीछे धार्मिक कारण है। चंद्रमा को देवता माना गया है और अर्घ्य का जल पवित्र होता है। पैरों पर जल पड़ना देवता का अपमान माना जाता है, जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। साथ ही पैरों पर जल पड़ने से व्रत की शुद्धता भी भंग होती है।

इसलिए हमेशा ऊंची जगह से या थाली में अर्घ्य दें और ध्यान रखें कि जल जमीन पर गिरे, पैरों पर नहीं। साफ मन और सही विधि से किया गया व्रत ही सुख और सौभाग्य लाता है। चलिए हम आपको बताते हैं कि वो कौन सी एक गलती है, जो चंद्रमा को अर्घ्‍य देते वक्‍त अमूमन महिलाओं से हो जाती है और जिससे व्रत की पवित्रता भी नष्‍ट हो सकती है।

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय पैरों पर क्यों नहीं पड़ना चाहिए जल?

हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्रमा को देवस्वरूप माना गया है। पूजा-पाठ में जल अर्पित करने की परंपरा का विशेष महत्व है। करवाचौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देना व्रत की प्रमुख विधि में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवता को अर्पित किया जाने वाला जल पवित्र माना जाता है। इसलिए इस जल को पैरों से लगने या ऐसी जगह गिरने से बचाने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे वह अपवित्र हो जाए।

स्‍कंद पुराण में करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्‍य देने के विधान और परंपरा पर बताया गया है कि यह बहुत ही शुभ होता है और इससे रिश्‍तों में मधुरता आती है। ऐसे में इतने पवित्र जल का पैरों में पड़ना पूजा के अनादर का संकेत होता है। ऐसी मान्यता है कि इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने में बाधा आ सकती है।

अर्घ्य देते समय पानी की छींटों से कैसे बचें?

करवाचौथ की रात जब आप छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद अर्घ्य दें, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रख सकती हैं।

चंद्रमा को जल अर्पित करते समय अपने सामने एक साफ थाली या बड़ा पात्र रख लें। इससे जल जमीन पर बिखरने और पैरों पर छींटें पड़ने की आशंका कम हो सकती है।

अर्घ्य देते समय लोटे से धीरे-धीरे जल चढ़ाएं। बहुत ऊंचाई से या तेज धार में पानी डालने से बचें, क्योंकि इससे जल इधर-उधर गिर सकता है।

अर्घ्‍य देने से पहले आप नीचे कोई पवित्र पौधा भी रख सकती हैं। ऐसे में जल भी बेकार नही जाएगा और किसी पौधे के काम आएगा ।

करवाचौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का क्या है महत्व?

करवाचौथ पर चंद्रमा की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। चंद्रमा को शीतलता, मन की शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कई परिवारों में चंद्रमा के दर्शन के बाद पति को छलनी से देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण करने और व्रत खोलने की परंपरा भी निभाई जाती है।

अर्घ्य देते समय श्रद्धा, स्वच्छता और एकाग्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। पूजा में छोटी-छोटी सावधानियां रखने से विधि को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलती है।

करवाचौथ की पूजा में इन बातों का भी रखें ध्यान

करवाचौथ के दिन पूजा से पहले पूजन सामग्री व्यवस्थित कर लें। चंद्रमा निकलने के बाद उनके दर्शन करें और अपने परिवार की परंपरा के अनुसार अर्घ्य अर्पित करें। पूजा करते समय जल्दबाजी न करें और जल को ऐसी जगह न गिरने दें, जहां किसी के पैर पड़ सकते हों।

अत: सबसे जरूरी बात यह है कि यदि अनजाने में जल की कुछ बूंदें पैरों पर पड़ जाएं, तो घबराएं नहीं। इसे लेकर मन में डर रखने के बजाय शांति से अपने हाथ-पैर साफ कर लें और श्रद्धापूर्वक पूजा में हुई भूल चूक के लिए माफी मांग लें।

इस करवाचौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देते समय इन सावधानियों का ध्यान रखें और अपने व्रत को श्रद्धा और सकारात्मक भाव के साथ पूरा करें।

यह भी पढ़ें- करवाचौथ का चंद्रमा क्यों है सौभाग्य का प्रतीक: पढ़ें देवी पार्वती के तेज से लेकर दांपत्य के पोषण तक की अनूठी कथा

यह भी पढ़ें- Karwa Chauth 2026: करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में रहेगा चंद्रमा, जानें व्रत खोलने का सही समय

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।