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    जब भगवान गणेश ने पलटा मुनि अगस्त्य का कमंडल: पढ़ें कावेरी नदी की उत्पत्ति का रहस्य

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 08:00 PM (IST)

    पौराणिक कथा के अनुसार, कावेरी नदी की उत्पत्ति भगवान गणेश और ऋषि अगस्त्य से जुड़ी है। इसे दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है और इसका वर्णन स्कंद पुराण में ...और पढ़ें

    कावेरी नदी कैसे अवतरित हुई? (Picture Credit- AI Generated)

    कावेरी नदी कैसे अवतरित हुई? (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. भगवान गणेश ने पलटा ऋषि अगस्त्य का कमंडल

    2. कावेरी नदी की उत्पत्ति की अद्भुत पौराणिक कथा

    3. दक्षिण भारत में कावेरी को गंगा समान पूजनीय

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में कावेरी नदी को पूजनीय माना जाता है। इस नदी का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस नदी के जन्म की कथा भगवान गणेश और ऋषि अगस्त्य से संबंधित है। क्या आप जानते हैं कि आखिर कैसे हुई कावेरी नदी की उत्पति। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि कावेरी नदी के जन्म की पौराणिक कथा के बारे में।

    कैसे हुई कावेरी नदी की उत्पत्ति

    पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ, तो उसमें कैलाश पर्वत पर देवता और ऋषि पहुचें, तो पर्वत का भार उत्तर दिशा की तरफ हो गया। इसलिए महादेव ने अगस्त्य मुनि को दक्षिण भारत भेजा और उनके कमंडल में कावेरी को स्थापित कर दिया, जिसे भूमि का संतुलन बना रहे। वहीं, असुर सुरपद्म के आतंक की वजह से बारिश रुक गई, जिसकी वजह से देवराज इंद्र चिंतित हुए।

    kaveri river

     

    ऐसे में देवराज इंद्र को नारद मुनि ने बताया कि कावेरी अगस्त्य के कमंडल में है। ऐसे में देवताओं को महसूस हुआ कि अगर दिव्य जल कमंडल में ही रहा, तो इसके लाभ से लोग वंचित रह जाएंगे। इसलिए देवता भगवान गणेश की शरण में पहुचें और उनसे मदद मांगी। इसके बाद भगवान गणेश ने कौए का रूप धारण किया।

    भगवान गणेश ऋषि अगस्त्य के पास पहुचें और उनके कमंडल के ऊपर जाकर बैठ गए। इसके बाद जब ऋषि अगस्त्य ने कौए को उड़ाने का प्रयास किया, तो कमंडल गिर गया और उसमें भरा हुआ जल जमीन पर बहने लगा, जिससे कावेरी नदी का उद्गम हुआ। पहले तो ऋषि अगस्त्य को इस घटना के बारे में पता नहीं लगा, लेकिन जब बाद में इसका कारण पता चला, तो उन्हें ज्ञात हुआ कि यह कोई साधारण कौआ नहीं था। यह भगवान गणेश थे।

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    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जितना उत्तर भारत में गंगा नदी को महत्वपूर्ण माना जाता है। उतना ही दक्षिण भारत में कावेरी नदी को बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए कावेरी नदी को दक्षिण की गंगा कहा जाता है।

    शस्त्रों में मिलता है वर्णन

    कावेरी नदी का वर्णन स्कंद पुराण में कावेरी माहात्म्य नाम के खंड में मिलता है। इसके अलावा श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध में भी कावेरी नदी की उत्पति का वर्णन देखने को मिलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।