द्रौपदी का अपमान और भीम का क्रोध: महाभारत युद्ध से पहले क्यों जरूरी था कीचक का वध?
महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत संस्कृत वाङ्मय का सबसे बड़ा ग्रंथ है, जिसमें महाभारत की घटना का विस्तार से वर्णन किया गया है।

भीम ने लिया द्रौपदी के अपमान का बदला (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
कीचक, राजा विराट का अहंकारी सेनापति था
अज्ञातवास में द्रौपदी का कीचक ने अपमान किया
भीम और कीचक के बीच हुआ भयंकर मल्लयुद्ध
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चौसर में हार जाने के बाद पांडवों को वनवास मिला, जिसमें उन्हें 12 साल के वनवास और एक साल अज्ञातवास का सामना करना पड़ा। 12 साल का वनवास समाप्त होने के बाद एक साल अज्ञातवास भोगने के लिए पांडव विराट नगरी चले गए थे।
राजा विराट के महल में द्रोपदी समेत सभी पांडवों ने अलग-अलग भूमिका निभाई। अज्ञातवास के दौरान ही शक्तिशाली योद्धा कीचक का वध भी हुआ। चलिए जानते हैं इस अद्भुत कथा के बारे में।
कीचक कौन था?
महाभारत में वर्णन मिलता है कि, कीचक वध की घटना पांडवों के 13वें वर्ष के अज्ञातवास के दौरान मत्स्य देश में हुई थी, जो राजा विराट का राज्य था। कीचक राजा विराट की पत्नी सुदेष्णा का भाई और मत्स्य देश का प्रधान सेनापति था। कीचक एक क्रूर और अहंकारी योद्धा था, दो इतना शक्तिशाली था कि स्वंय राजा विराट भी उससे डरते थे। माना जाता था कि कीचक में 10,000 हाथियों का बल था। उपकीचक नाम के उसके 105 भाई भी थे।

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यह बना वध का कारण
अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी, 'सैरंध्री' नामक एक दासी बनी थी, जो रानी सुदेष्णा की सेवा में रहती थीं। एक बार जब कीचक अपनी बहन सुदेष्णा से मिलने उसके महल में आया, तो उसकी नजर द्रौपदी पर पड़ी। कीचक द्रौपदी की सुंदरता पर मोहित हो गया और उसने द्रौपदी के साथ दुर्व्यवहार किया। जब राजा विराट ने भी कीचक को दंड नहीं दिया, तो द्रौपदी ने पांडुपुत्र भीम से सहायता मांगी, जो अज्ञातवास में 'बल्लव' नामक एक रसोइया बने थे।
इस तरह बनाई योजना
भीम ने एक योजना बनाई और द्रौपदी ने भीम के कहने पर कीचक को रात के समय सुनसान नृत्यशाला में मिलने बुलाया। भीम, द्रौपदी का वेश धारण कर, उस अंधेरी नृत्यशाला में पहले से ही पलंग पर लेट गए थे।
कीचक वहां पहुंचा, तो उसने द्रौपदी समझकर भीम को छुआ, लेकिन वैसे ही भीम ने उसपर भीषण प्रहार किया, जिससे कीचक दूर जा गिरा। दोनों के बीच भयानक मल्लयुद्ध हुआ। कीचक, भीम के बल से पार न पा सका और उनके हाथों मारा गया। इस प्रकार कीचक की कामुकता उसके अंत का कारण बनी।

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दुर्योधन को हुआ शक
कीचक के मारे जाने के बाद, उसके 105 भाई (उपकीचक) अत्यंत दुखी और क्रोधित हुए। उन्होंने द्रौपदी को अपने भाई की मौत का कारण मानते हुए, उसे मारने का प्रयास किया, लेकिन भीम ने उन सभी का वध कर दिया। कीचक और उसके भाई के वध के कारण ही दुर्योधन को यह संदेह हुआ कि पांडव विराट नगर में ही छिपे हैं।
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